Basant Panchami 2026 Shubh Muhurat: बसंत पंचमी आज, जानें मां सरस्वती के पूजन का शुभ मुहूर्त और उपासना विधि

Basant Panchami 2026 Shubh Muhurat: हिंदू धर्म में मां सरस्वती देवी को ज्ञान, कला और संगीत की देवी कहा गया है. मान्यतानुसार जीवन में ज्ञान, कला और संगीत के जरिए कृपा पाने के लिए हर साल बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा की जाती है. आज मां सरस्वती की पूजा का मुहूर्त सुबह 7 बजकर 33 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.

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बसंत पंचमी 2026 पूजन का ये रहेगा शुभ मुहूर्त (Photo: ITG) बसंत पंचमी 2026 पूजन का ये रहेगा शुभ मुहूर्त (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:00 AM IST

Basant Panchami 2026 Shubh Muhurat: 23 जनवरी यानी आज बसंत पंचमी का पर्व पूरे देश में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. यह दिन मां सरस्वती को समर्पित होता है, जिन्हें विद्या, बुद्धि और वाणी की देवी माना जाता है. इस दिन लोग ज्ञान, शिक्षा और कला में सफलता की कामना से मां सरस्वती की पूजा करते हैं. खासतौर पर छात्रों, शिक्षकों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

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इसी दिन से ऋतुओं में बदलाव शुरू होता है और बसंत ऋतु का आगमन होता है. यही कारण है कि यह दिन पीले रंग की खुशी, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की सच्चे मन से पूजा करने से पढ़ाई में मन लगता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं.

बसंत पंचमी 2026 पूजन मुहूर्त (Basant Panchami 2026 Pujan Muhurat) 

बसंत पंचमी के दिन पूजा के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना जाता है. सूर्योदय के बाद से दोपहर तक मां सरस्वती की आराधना करना शुभ फल देता है. इस दौरान मन शांत रहता है और पूजा का पूरा लाभ मिलता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी की तिथि आज अर्धरात्रि में 2 बजकर 28 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 24 जनवरी, शनिवार की रात 1 बजकर 46 मिनट पर होगा. बसंत पंचमी पर आज सरस्वती माता का पूजन मुहूर्त सुबह 7 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.   

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बसंत पंचमी 2026 शुभ संयोग (Basant Panchami 2026 Shubh Sanyog)

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी को खास दिन माना जाता है, क्योंकि इसे अबूझ मुहूर्त का दर्जा दिया गया है. इसका अर्थ है कि इस दिन शादी, गृह प्रवेश, नया वाहन लेने, प्रॉपर्टी से जुड़े काम या किसी नए कार्य की शुरुआत के लिए अलग से शुभ समय देखने की जरूरत नहीं होती. लोग इस दिन बिना किसी चिंता के नए काम शुरू कर सकते हैं.

इस साल बसंत पंचमी पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जो दिन के महत्व को और बढ़ा रहे हैं. परिधि योग और शिव योग के प्रभाव से यह समय आत्मिक उन्नति और कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जा रहा है. साथ ही रवि योग का संयोग भी बन रहा है, जिसे नकारात्मकता को कम करने और प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला माना जाता है. इन शुभ योगों में किया गया पूजन और मंगल कार्य लंबे समय तक अच्छे परिणाम दे सकता है.

ज्योतिष के अनुसार, रवि योग आज दोपहर 2 बजकर 33 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह 7 बजकर 13 मिनट तक रहेगा. इस दौरान किए गए शुभ कार्यों का प्रभाव विशेष रूप से फलदायी माना जाता है.

बसंत पंचमी 2026 पूजन विधि (Basant Panchami 2026 Pujan Vidhi)

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बसंत पंचमी के दिन पूजा से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें. इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है, इसलिए संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करें. घर के मंदिर या साफ स्थान पर मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर रखें. उन्हें पीले फूल, अक्षत, हल्दी और मीठा अर्पित करें. इसके बाद मां सरस्वती का ध्यान करते हुए मंत्रों का जाप करें. पूजा के समय किताबें, कॉपी, वाद्य यंत्र या पढ़ाई से जुड़ी चीजें मां के पास रखी जा सकती हैं. इससे ज्ञान और एकाग्रता बढ़ती है. अंत में मां से बुद्धि, विवेक और सफलता का आशीर्वाद मांगें.

बच्चों और शिक्षा से जुड़े कार्य बसंत पंचमी पर क्यों हैं खास?

बसंत पंचमी को बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत के लिए बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन छोटे बच्चों को पहली बार लिखना सिखाना या पढ़ाई से जुड़ा कोई नया कदम उठाना अच्छा फल देता है. इस दिन जरूरतमंद बच्चों को किताबें, कॉपी या पेन दान करना भी पुण्यकारी माना गया है. इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना और पीले रंग की मिठाई मां सरस्वती को अर्पित करना शुभ माना जाता है, क्योंकि पीला रंग ज्ञान और शुभता का प्रतीक है.

बसंत पंचमी मंत्र (Basant Panchami Mantra)

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। 

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या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ 

या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।

सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥ 

शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।

वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥ 

हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।

वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥

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