व्रतों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्रत एकादशी का होता है. एकादशी का नियमित व्रत रखने से मन कि चंचलता समाप्त होती है और धन-आरोग्य की प्राप्ति होती है. इस व्रत से मनोरोग भी दूर होते हैं. पापमोचनी एकादशी आरोग्य, संतान प्राप्ति तथा प्रायश्चित के लिए किया जाने वाला व्रत है. यह व्रत चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है. पापमोचनी एकादशी व्रत 7 अप्रैल को यानी आज है.
क्या हैं इस व्रत को रखने के नियम?
यह व्रत दो प्रकार से रखा जाता है- निर्जल और फलाहारी या जलीय व्रत. सामान्यतः निर्जल व्रत पूर्ण रूप से स्वस्थ्य व्यक्ति को ही रखना चाहिए. अन्य या सामान्य लोगों को फलाहारी या जलीय उपवास रखना चाहिए. इस व्रत में दशमी को केवल एक बार सात्विक आहार ग्रहण करनी चाहिए. एकादशी को प्रातः काल ही श्रीहरि का पूजन करना चाहिए. अगर रात्रि जागरण करके श्री हरि की उपासना की जाय तो हर पाप का प्रायश्चित हो सकता है. बेहतर होगा कि इस दिन केवल जल और फल का ही सेवन किया जाए.
उपवास न रख पाने पर किस प्रकार करें पापों का प्रायश्चित?
प्रातःकाल स्नान करके श्री हरि की उपासना करें. दिन में एक बार विष्णु सहस्त्रनाम या श्रीमदभागवद का पाठ करें. सायंकाल पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों तेल का दीपक जलाएं. ज्यादा से ज्यादा अपने ईष्ट देव या देवी की प्रार्थना करें. निर्धनों को अन्न और वस्त्र का दान करें.
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