राजस्थान में नए जिले बनाने से CM गहलोत को क्या फायदा? यहां समझें पूरा सियासी गणित

राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के नए जिलों की घोषणा के बाद इस फैसले के कई मायने निकाले जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इस फैसले से सीएम गहलोत ने 113 विधानसभाओं के वोटर्स को अपनी ओर लुभाने की कोशिश की है.

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राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत (फाइल फोटो) राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत (फाइल फोटो)

जयकिशन शर्मा

  • जयपुर,
  • 18 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 2:14 PM IST

चुनाव से कुछ महीनों पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नए जिलों के गठन की घोषणा कर एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की है. एक तो यह स्पष्ट हो जाता है कि गहलोत एंटी-इनकंबेंसी का मुकाबला कर रहे हैं और दूसरा वह यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि राजस्थान में उनके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है.

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सीएम गहलोत ने विधानसभा में जिन 19 नए जिलों को बनाने की घोषणा की है, उनमें अनूपगढ़, बालोतरा, ब्यावर, डीग, दूदू, जयपुर उत्तर, जयपुर दक्षिण, जोधपुर पूर्व, जोधपुर पश्चिम, गंगापुर सिटी, केकड़ी, कोटपुतली, बहरोड़, खैरतल, नीमकाथाना , सांचोर, फलोदी, सलुंबर, शाहपुरा शामिल हैं. इन जिलों के बनने से राज्य की 113 विधानसभा सीटें प्रभावित हो रही हैं.

113 विधानसभा सीटों के वोटर्स को रिझाने की कोशिश

नए जिलों की घोषणा के फैसले से प्रदेश की 113 विधानसभाओं के मतदाताओं को सीधे तौर पर रिझाने में मदद मिलेगी. साथ ही, यह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गढ़ में वोट बटोरने में मदद कर सकता है.

113 सीटों में जयपुर - 19, जोधपुर - 10, अलवर - 11, अजमेर - 8, श्रीगंगानगर - 6, बाड़मेर - 7, भरतपुर - 7, नागौर - 10, सवाई माधोपुर - 4, जालोर - 5, उदयपुर - 7, बांसवाड़ा - 5, पाली - 6 और सीकर में 8 सीटें शामिल हैं. 

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क्या हैं इसके मायने?

नए जिले बनाने की घोषणा के विश्लेषण से पता चलता है कि गहलोत के तीन मंत्रियों को जिले मिले हैं. सुखराम विश्नोई को सांचौर, राजेंद्र यादव को कोटपूतली-बहरोड, विश्वेंद्र सिंह को डींग मिला. पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को सीकर संभाग, सलाहकार रामकेश मीणा को गंगापुर शहर जिला और बाबूलाल नगर को डूडू जिला मिला. डिप्टी व्हिप महेंद्र चौधरी को कुचामन डीडवाना को शामिल कर जिला मिला है.

गहलोत के करीबियों को क्षेत्रों को बनाया जनपद

वहीं सीएम गहलोत के करीबी रघुवीर मीणा को सलूंबर जिला मिला. बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए दीपचंद खेरिया को खैरथल जिला मिला है. बता दें कि गहलोत ने बांसवाड़ा को संभाग और सलूंबर को जिला बनाकर आदिवासियों पर अपनी पकड़ और मजबूत करने की कोशिश की है. गुजरात प्रभारी रघु शर्मा को केकड़ी जिला मिला है, जो कि उनका गृह क्षेत्र है.

भाजपा के गढ़ में सेंधमारी की कोशिश

बताते चलें कि सीएम अशोक गहलोत ने सिर्फ जोधपुर में ही तीन जिले बनाए हैं. उधर, जयपुर में भाजपा के गढ़ क्षेत्रों में पैठ बनाने की राजनीतिक चाल चल रही है. पाली, जालोर और सिरोही बीजेपी के गढ़ हैं. गहलोत ने सांचौर को जिला और पाली को संभाग बनाकर इन इलाकों में पैठ बनाने की कोशिश की है. श्रीगंगानगर संभाग के अनूपगढ़ में भी भाजपा की सीट तोड़ने की कोशिश की जा रही है.

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19 जिलों की घोषणा के बाद रहेंगे कुल 50 जिले

गौरतलब है कि राजस्थान में पहले 33 जिले थे. बीते दिन मुख्यमंत्री ने 19 नए जिलों की घोषणा की, लेकिन इसके बाद भी राज्य में कुल जिलों की संख्या 50 ही रहेगी. ऐसा इसलिए क्योंकि जयपुर को जयपुर उत्तर और जयपुर दक्षिण में बांटा गया है, जबकि जोधपुर को जोधपुर पूर्व और जोधपुर पश्चिम में बांटा गया है. घोषणा में तीन नए संभागीय मुख्यालय बनाए गए हैं. सीकर, पाली और बांसवाड़ा. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन मुख्यालयों के अंतर्गत कौन से जिले काम करेंगे. इसमें भी क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है. शेखावाटी से सीकर, मारवाड़ से पाली और मेवाड़ के आदिवासी क्षेत्र से बांसवाड़ा को तराशा गया है.

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