नेपाल (Nepal) की अन्नपूर्णा हिल्स (Annapurna Hills) से अजमेर के पर्वतारोही का 3 दिन बाद रेस्क्यू किया गया था. गंभीर हालत पर्वतारोही अनुराग मालू को स्थानीय अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. फिलहाल वह वेंटिलेटर पर हैं. उनके भाई और अन्य लोग नेपाल में उनके साथ हैं. परिवार और जानने वाले अनुराग के जल्द से जल्द ठीक होने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं. पिता ने अनुराग का रेस्क्यू करने वाले टीम का आभार प्रकट किया है.
दरअसल, 17 अप्रैल को दुनिया की 10 वीं सबसे ऊंची पर्वत चोटी अन्नपूर्णा के तीसरे कैंप से नीचे उतरते वक्त अजमेर के किशनगढ़ निवासी 34 साल के पर्वतारोही अनुराग मालू, हिमाचल के रहने वाले पर्वतारोही अर्जुन वाजपेई, बलजीत कौर और आयरलैंड के पर्वतारोही नोएल हन्ना हादसे का शिकार हो गए थे. अनुराग 6 हजार फीट गहरी बर्फ से ढकी खाई में गिरने के बाद से मिसिंग थे.
उनके साथी अर्जुन वाजपेई, बलजीत कौर को रेस्क्यू कर लिया गया था और आयरलैंड के पर्वतारोही नोएल हन्ना की इस हादसे में मौत हो गई थी. मगर, अनुराग का कुछ पता नहीं चल पाया था.
बर्फ में दबे मिले अनुराग
हादसे के बाद से ही भारत और नेपाल की आर्मी टीम लगातार अनुराग मालू को सर्च कर रही थीं. वहीं, जानकारी मिलके बाद अनुराग के भाई के साथ अन्य लोग भी नेपाल पहुंच गए थे. बेटे की सलामती के लिए परिवार के लोग भगवान से प्रार्थना करने में जुटे हुए थे.
बुधवार को सर्च टीम को अनुराग के 6 हजार फीट की गहराई में होने की जानकारी लगी. इसके बाद टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद बर्फ में दबे हुए अनुराग का रेस्क्यू किया था. उनकी हालत गंभीर थी. उन्हें तुरंत ही स्थानीय अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था. तभी से अनुराग वेंटिलेटर पर हैं.
बेटे के जिंदा रेस्क्यू होने की खबर जैसे ही उनके परिवार को मिली तो उन लोगों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए. पिता ओमप्रकाश मालू ने कहा था कि बेटे के रेस्क्यू के लिए भारत और नेपाल की आर्मी टीम को धन्यवाद है. वहीं, अनुराग के जिंदा होने के खबर किशनगढ़ में फैली तो लोग ओमप्रकाश के मिलने के लिए उनके घर पहुंचने लगे.
मालू को मिला है रेक्स करमवीर चक्र
बताया गया है कि मालू को रेक्स करमवीर चक्र (Rex Karamveer Chakra) से सम्मानित किया गया है. वह भारत से 2041 अंटार्कटिक यूथ एंबेसडर भी बने हैं.
सबसे ज्यादा मौतें होती हैं यहां
जिस पर्वत से अनुराग नीचे उतर रहे थे वह अन्नपूर्णा पर्वत दुनिया का दसवां सबसे ऊँचा पर्वत है, जो समुद्र तल से 8,091 मीटर (26,545 फीट) ऊपर है. इस पर चढ़ाई काफी कठिन होती है. इसी कारण से यहां पर सबसे ज्यादा पर्वतारोहियों की मौत होती है. इस पर चढ़ने वाले लोगों में से 32 फीसदी लोग मारे जाते हैं. यहां पर मौतों का आंकड़ा एवरेस्ट से 4 से 5 गुना ज्यादा है.
चंद्रशेखर शर्मा