चाक, धागा और लकड़ी के टुकड़े खा लेती थी 14 साल की बच्ची... सर्जरी कर डॉक्टरों ने निकाला दुनिया का सबसे लंबा ट्राइकोबेज़ोअर

जयपुर के सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की. डॉक्टरों ने 14 वर्षीय लड़की के पेट से संभवतः दुनिया का सबसे लंबा ट्राइकोबेज़ोअर (गांठ) निकालने में कामयाबी हासिल की.

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सर्जरी कर डॉक्टरों ने निकाला दुनिया का सबसे लंबा ट्राइकोबेज़ोअर सर्जरी कर डॉक्टरों ने निकाला दुनिया का सबसे लंबा ट्राइकोबेज़ोअर

रिदम जैन / देव अंकुर

  • जयपुर,
  • 31 मई 2025,
  • अपडेटेड 12:24 PM IST

मेडिकल सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जयपुर के सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल के डॉक्टरों ने  एक बड़ी कामयाबी हासिल की. डॉक्टरों ने 14 वर्षीय लड़की के पेट से संभवतः दुनिया का सबसे लंबा ट्राइकोबेज़ोअर (गांठ) निकालने में कामयाबी हासिल की.

चाक, धागा, मिट्टी और लकड़ी के टुकड़े खा लेती थी बच्ची 

जानकारी के मुताबिक ​​उत्तर प्रदेश के आगरा के बरारा गांव की रहने वाली यह लड़की 10वीं कक्षा की छात्रा है और वह ऐसी बीमारी से पीड़ित थी, जिसमें वह चाक, धागा, मिट्टी, लकड़ी के टुकड़े निगल जाती थी या खा लेती थी. यह आदत उसने दूसरों को देखकर सीखी थी.

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चिकित्सकीय रूप से इस मनोवैज्ञानिक स्थिति को पिका कहा जाता है. जिसमें व्यक्ति गैर-खाद्य पदार्थों का सेवन करता है. लड़की को सवाई मान सिंह अस्पताल लाए जाने से पहले, उसे एक महीने से अधिक समय से पेट में काफी दर्द और उल्टी हो रही थी. उसकी जांच की गई और उसके बाद डॉक्टरों ने उसके पेट में पेट से लेकर नाभि और पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से तक फैला एक सख्त द्रव्यमान पाया.

2 घंटे तक चली थी सर्जरी

साथ ही एक कंट्रास्ट एन्हांस्ड सीटी (सीईसीटी) स्कैन किया गया, जिसमें एक असामान्य वस्तु से भरा हुआ सूजा हुआ पेट पाया गया. लड़की का लगातार ऑपरेशन किया गया जो करीब 2 घंटे तक चला.  गैस्ट्रोटॉमी के दौरान डॉक्टरों को सबसे ज़्यादा हैरानी इस बात की थी कि ट्राइकोबेज़ोअर सिर्फ़ पेट तक सीमित नहीं था. यह छोटी आंत में भी चला गया था.

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ऑपरेशन करने वाली टीम ने इसे एक ही टुकड़े में निकालने की बड़ी चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर लिया, ताकि इसे तोड़ने की ज़रूरत न पड़े क्योंकि ऐसा करने के लिए आंतों में कई चीरे लगाने पड़ते. यह सर्जरी डॉ. जीवन कांकरिया और उनकी टीम द्वारा सफलतापूर्वक की गई. जिसमें डॉ. राजेंद्र बुगालिया, डॉ. देवेंद्र सैनी, डॉ. अमित और डॉ. सुनील चौहान के साथ उनकी एनेस्थीसिया टीम शामिल थी. ऑपरेशन में सहयोगी स्टाफ़ शायर और जुगन ने भी अहम भूमिका निभाई.

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