हनुमान भक्ति की मिसाल! अलवर में लंगूर की आत्मा शांति के लिए सुंदरकांड और विशाल भंडारे का आयोजन

राजस्थान के अलवर जिले के गोविंदगढ़ कस्बे में करंट से मरे लंगूर की आत्मा शांति के लिए सुंदरकांड पाठ और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया. लंगूर को हनुमान का स्वरूप मानते हुए कस्बेवासियों ने बैंड-बाजों के साथ उसकी शव यात्रा निकालकर धार्मिक रीति से अंतिम संस्कार किया. आयोजन में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए.

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आयोजन में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए.(Photo: Screengrab) आयोजन में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए.(Photo: Screengrab)

हिमांशु शर्मा

  • अलवर,
  • 03 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:02 PM IST

राजस्थान के अलवर जिले के गोविंदगढ़ कस्बे में हनुमान भक्ति और करुणा का एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जिसने लोगों को भावुक कर दिया. कुछ दिन पहले बस स्टैंड के पास करंट की चपेट में आने से एक लंगूर की दर्दनाक मौत हो गई थी. इस घटना ने पूरे कस्बे को झकझोर कर रख दिया.

लंगूर को भगवान हनुमान का स्वरूप मानने वाले कस्बेवासियों ने इस हादसे को सिर्फ एक दुर्घटना नहीं माना, बल्कि आस्था से जोड़ते हुए उसे धार्मिक परंपराओं के साथ अंतिम विदाई देने का फैसला किया. लोगों ने लंगूर की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा-पाठ का आयोजन किया.

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बैंड-बाजों के साथ निकली शव यात्रा, जय बजरंग बली के लगे जयकारे

24 दिसंबर को जैसे ही लंगूर की मौत की खबर फैली, कस्बे के व्यापारी, गौसेवक और श्रद्धालु एकजुट हो गए. सभी ने मिलकर बैंड-बाजों के साथ लंगूर की शव यात्रा निकाली. पूरे गोविंदगढ़ में “जय बजरंग बली” के जयकारे गूंजते रहे.

हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार लंगूर का अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं. लंगूर की असामयिक मौत से कस्बे में शोक का माहौल रहा और हर कोई इस दृश्य से भावुक नजर आया.

बिजली के खुले तारों पर उठे सवाल, सुरक्षा की मांग

इस घटना के बाद लोगों ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और सार्वजनिक स्थानों पर खुले बिजली के तारों और खंभों को लेकर चिंता जताई. कस्बेवासियों ने मांग की कि ऐसे खतरनाक तारों को सुरक्षित किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी जीव-जंतु के साथ इस तरह की घटना न हो.

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लोगों का कहना था कि यह हादसा एक चेतावनी है और समय रहते जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए.

सुंदरकांड, सत्संग और विशाल भंडारे का आयोजन

शनिवार दोपहर करीब बारह बजे लंगूर की आत्मा की शांति के लिए सुंदरकांड पाठ, सत्संग और हरि कीर्तन का आयोजन किया गया. इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया.

भक्ति और सेवा से जुड़े इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि गोविंदगढ़ की धरती पर सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि हर जीव के प्रति करुणा और श्रद्धा का भाव है. हनुमान भक्ति से ओत-प्रोत यह आयोजन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.

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