भैंस लेकर जिला परिषद दफ्तर पहुंच गए नेता जी, प्रशासन के खिलाफ किया हंगामा

अलवर जिला परिषद की बैठक में उस वक्त हंगामा मच गया, जब ग्राम अलीपुर में करंट लगने से 11 भैंसों की मौत के विरोध में पार्षद भैंस लेकर बैठक में पहुंच गए. प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया और कार्रवाई की मांग उठी. अधिकारियों की गैरहाजिरी को लेकर भी पार्षदों ने तीखा विरोध दर्ज कराया और आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी.

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भैंस लेकर मीटिंग में पहुंचे नेता जी (Photo: Screengrab) भैंस लेकर मीटिंग में पहुंचे नेता जी (Photo: Screengrab)

हिमांशु शर्मा

  • अलवर,
  • 10 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:13 PM IST

राजस्थान के अलवर जिले में जिला परिषद की सभा उस वक्त सुर्खियों में आ गई, जब विरोध का एक बेहद अनोखा और प्रतीकात्मक रूप देखने को मिला. मुंडावर उपखंड के अलीपुर में करंट लगने से 11 भैंसों की मौत के मामले को लेकर आक्रोशित जिला पार्षद भैंस लेकर सीधे जिला परिषद कार्यालय पहुंच गए और प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया.

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घटना के अनुसार, ग्राम अलीपुर में हाल ही में बिजली करंट की चपेट में आने से एक साथ 11 भैंसों की मौत हो गई थी, जिससे कई पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा. इस मामले को लेकर जिला परिषद की बैठक में पार्षद संदीप फौलादपुरिया ने प्रतीकात्मक रूप से भैंस के साथ पहुंचकर विरोध जताया. उनका कहना था कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद न तो कोई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने पीड़ित परिवारों की सुध ली.

भैंस लेकर जिला परिषद पहुंचे पार्षद

पार्षद संदीप फौलादपुरिया ने आरोप लगाया कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और ऐसी घटनाओं में तत्काल राहत, मुआवजा और जिम्मेदारों पर कार्रवाई बेहद जरूरी है लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण अब तक पीड़ित परिवारों को कोई सहायता नहीं मिल पाई है. उन्होंने मांग की कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो.

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करंट से 11 भैंसों की मौत पर भड़के पार्षद

बैठक के दौरान केवल यही मुद्दा नहीं उठा, बल्कि जिला परिषद की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की गैरहाजिरी पर भी सवाल खड़े किए गए. जिला पार्षद जगदीश जाटव ने हाथ में लिखित शिकायत लेकर अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि कई बार की बैठकों में आधे से अधिक अधिकारी उपस्थित नहीं रहते, जिससे जनसमस्याओं का समाधान प्रभावित होता है.

पार्षदों का आरोप है कि जिला कलेक्टर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से बैठकों में नहीं आते, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही कमजोर होती जा रही है. यहां तक कि केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री भी जिला परिषद की बैठकों में भाग नहीं ले रहे हैं.
 

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