हाईवे पर गाड़ियां गुज़र रही थीं मगर किसी की नज़र इस लाश पर नहीं पड़ी और जब इस लाश को देखा गया तो वो दरअसल देखने के लायक ही नहीं बची थी. बदन पर कपड़े तो थे मगर पहचान बताने वाली कोई ऐसी चीज़ नहीं थी जिससे ये पता चल सके कि मरने वाला कौन था. लाश के चेहरे को किसी भारी वस्तु से कूच कर और बाद में जलाकर बुरी तरह से बिगाड़ा गया था कि कुछ भी पता करना नामुमकिन था. पूरे तीन महीने तक पुलिस उस लाश की पहचान करने की तमाम कोशिश करती रही लेकिन कामयाबी हाथ नहीं लगी. आखिरकार थक हार कर पुलिस ने खुद ही उस लाश को उसका चेहरा देने का फैसला किया और इसके साथ ही शुरू होता है ऑपरेशन चेहरा. वारदात में देखें क्या है ऑपरेशन चेहरा.