ड्रिप लगी बच्ची को गोद में उठाया, कलेक्टर के सामने पहुंचे पिता की गुहार... इलाज करा दीजिए

बैतुल में एक पिता अपनी 6 साल की बीमार बच्ची को ड्रिप लगी हालत में गोदी में उठाकर कलेक्टर के सामने ले गया. कहा कि मेरी बेटी तड़प रही है, लेकिन उसका इलाज करने के लिए अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं है. कलेक्टर ने जिला अस्पताल के डॉक्टर को फोन करके कहा बच्ची का इलाज अच्छे तरीके से किया जाए. उन्होंने इसकी मॉनिटरिंग का कार्य अपने स्टेनो को सौंपा.

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बीमार बेटी को गोद में उठाकर कलेक्टर ऑफिस लेकर पहुंचा पिता बीमार बेटी को गोद में उठाकर कलेक्टर ऑफिस लेकर पहुंचा पिता

राजेश भाटिया

  • बैतूल ,
  • 26 मई 2023,
  • अपडेटेड 7:35 AM IST

मध्य प्रदेश के बैतूल में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हालत में हैं. इसकी बानगी तब दिखी, जब एक शख्स अपनी 6 साल की बीमार बच्ची को ड्रिप लगी हालत में गोद में उठाकर कलेक्टर के सामने ले गया. शख्स ने कलेक्टर से कहा कि उसकी बेटी तड़प रही है और इलाज करने वाले डॉक्टर  कल से अब तक नहीं आए हैं.

कलेक्टर ने तत्काल डॉक्टर को फोन लगाकर बच्ची का अच्छे तरीके से इलाज करने के निर्देश दिए. स्थानीय लोगों का कहना है कि जिल अस्पताल की हालत बद से बदतर है. गुरुवार को बीमार बेटी, जिसके हाथ में ड्रिप लगी है उसे मजबूर पिता गोद में उठाकर बैतूल कलेक्टर अमनबीर सिंह बैस के चेंबर में पहुंच गया.

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बीमार बेटी गोद में थी और पीछे एक बच्चा बॉटल पकड़े था और मां उनके बगल में खड़ी थी. इस नजारे को देखकर लोगों की आंखे भर आईं. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

बच्ची को था अपेंडिक्स का दर्द, डॉक्टर देखने तक नहीं आए  

दरअसल, आजाद वार्ड में रहने वाले गुफरान फारुकी की 6 साल की बेटी मिफ्ता फारुखी को पेट में दर्द था. उसे बुधवार की रात जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने बच्ची की जांच की और परिजनों को बताया कि उसे अपेंडिक्स का दर्द है.  

बच्ची को प्राथमिक उपचार दिया गया. इसके साथ ही परिजनों को बताया गया कि उसका इलाज जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. रंजीत राठौर करेंगे. पिता गुफरान फारूकी का आरोप है बुधवार रात से गुरुवार की दोपहर तक डॉक्टर रंजीत राठौर उनकी बेटी को देखने तक नहीं आए.  

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इसके बाद उन्होंने डॉ. रंजीत राठौर को फोन लगाया, तो उन्होंने साफ बोल दिया कि शाम 5 बजे के बाद आएंगे. साथ ही यह भी कहा कि जिस वार्ड में बच्ची भर्ती है, वहां नहीं आएंगे. बच्ची को दूसरे वार्ड में लेकर आना पड़ेगा. 

कलेक्टर के निर्देश भी नहीं असरदार, निजी अस्पताल में कराया भर्ती

डॉक्टर के जवाब से नाराज परिजन बीमार बच्ची को कलेक्टर अमनबीर सिंह बैस के सामने ले गए. कलेक्टर ने परिजनों से कहा कि इसकी शिकायत फोन पर भी कर सकते थे. बच्ची को ऐसे लाना ठीक नहीं है. इसके बाद कलेक्टर ने जिला अस्पताल के डॉक्टर को फोन करके बोला इस बच्ची का इलाज अच्छे तरीके से किया जाए.

इसके अलावा उन्होंने बच्ची के इलाज की मॉनिटरिंग का कार्य अपने स्टेनो को सौंपा. इस सब के बावजूद जब बच्ची को फिर से जिला अस्पताल लेकर गए, तो लापरवाही का आलम देखने को मिला. बच्ची के इलाज की जिम्मेदारी जिस डॉक्टर को सौंपी गई थी, उस डॉक्टर के उलटे जवाब से परिजन परेशान हो गए. बाद में उन्हें बच्ची को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

पिता को प्राइवेट अस्पताल में ले जाकर इलाज करना पड़ा

इस मामले पर एमआरओ जिला अस्पताल डॉक्टर रानू वर्मा का कहना है कि मुझे दोपहर में पता चला था. बच्ची के परिजनों का फोन आया था. उसके पेट में दर्द है और उसका इलाज प्रॉपर नहीं हो रहा है.

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मैंने डॉक्टरों से बात की, तो पता चला कि बच्ची की सोनोग्राफी कराई गई है. पेट में इंफेक्शन है और उसे दवा भी दे दी गई थी. कलेक्टर साहब ने निर्देश दिए हैं कि बच्ची का इलाज अच्छे से किया जाए. मगर, परिजन बच्ची का इलाज कराने के लिए उसे प्राइवेट अस्पताल में ले गए.   

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