कनिष्का की चांदी... नेशनल ताइक्वांडो टूर्नामेंट में किया अच्छा प्रदर्शन, अब डेफ ओलंपिक है मंजिल

MP के बैतूल में चल रहे 67वें नेशनल स्कूल ताइक्वांडो टूर्नामेंट में मध्य प्रदेश की टीम में भोपाल की कनिष्का शर्मा भी शामिल हैं. 15 साल की कनिष्का जन्म से ही न बोल सकती हैं और न सुन सकती हैं. लेकिन उन्होंने अपनी दिव्यांगता को हराकर मंजिल की ओर कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं.  

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नेशनल स्कूल ताइक्वांडो टूर्नामेंट की सिल्वर विनर कनिष्का नेशनल स्कूल ताइक्वांडो टूर्नामेंट की सिल्वर विनर कनिष्का

राजेश भाटिया

  • बैतूल ,
  • 03 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 1:08 PM IST

मध्य प्रदेश के बैतूल में चल रहे नेशनल स्कूल ताइक्वांडो टूर्नामेंट में एक ऐसी बच्ची ने सिल्वर मेडल जीता जो न बोल सकती है और न ही सुन सकती है. पांच मैचों में नॉर्मल खिलाड़ियों को चार मैच में हराया और फाइनल मैच में हारने से गोल्ड से चूक गई. 

बैतूल में चल रहे 67वें नेशनल स्कूल ताइक्वांडो टूर्नामेंट में मध्य प्रदेश की टीम में भोपाल की कनिष्का शर्मा भी शामिल हैं. 15 साल की कनिष्का जन्म से ही न बोल सकती हैं और न सुन सकती हैं. लेकिन उन्होंने अपनी दिव्यांगता को हराकर मंजिल की ओर कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं.  

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बचपन से ही सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग लेने का शौक अब अलग पहचान दिला रहा है. कनिष्का ने ताइक्वांडो की ट्रेनिंग ली. इस ट्रेनिंग में मुश्किलें तो आईं, क्योंकि न वो बोल सकती थी और न ही सुन सकती थी. सिखाने वालों के सामने भी चैलेंज था, पर कनिष्का की लगन ने उसे राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बना दिया. ताइक्वांडो में स्टेट लेवल पर पांच गोल्ड जीतने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर एक सिल्वर जीतने के बाद बैतूल में दूसरा सिल्वर जीता.

डेफ स्कूल में सातवीं कक्षा पढ़ने वाली 15 साल की कनिष्का अंडर 68 वजन में 17 साल आयु वर्ग के फीमेल खिलाड़ियों की मध्य प्रदेश की टीम में खेलती हैं. कनिष्का मध्यप्रदेश की स्पोर्ट्स एकेडमी में है और डेफ ओलंपिक की तैयारी कर रही हैं. 

मंगलवार को कनिष्का ने बैतूल में चल रहे नेशनल स्कूल ताइक्वांडो टूर्नामेंट में क्वाटर फाइनल गुजरात की खिलाड़ी को हराया. सेमीफाइनल में पश्चिम बंगाल की राज रूपा को हराया और फाइनल में महाराष्ट्र की सिद्धि बेंडाले से हार गईं. कनिष्का ने सिल्वर जीत कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है.

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कोच के साथ कनिष्का

स्पोर्ट्स एकेडमी प्रमुख कोच जगजीत सिंह का कहना है, कनिष्का मेहनत बहुत करती है. ट्रेनिंग करने में काफी चेलेंज रहते हैं. हमको भी ट्रेनिंग करने में काफी चेलेंज रहते हैं, पर वह लड़की बहुत जुझारू है. हमें उम्मीद थी मेडल तो लेकर जाएगी. पर हमें उम्मीद थी कि गोल्ड जीतेगी. लेकिन किन्हीं कारणों से सिल्वर जीता उसके प्रदर्शन से हम लोग संतुष्ट हैं. अब डेफ ओलंपिक की तैयारी शुरू हो जाएगी.

कोच अर्जुन रावत का कहना है, कनिष्का को अलग से ट्रेनिंग देनी पड़ती है. वह बाकी बच्चों से थोड़ी वीक है. हमें उम्मीद थी कि वह मेडल लेगी और उसका बैतूल में अच्छा प्रदर्शन रहा है. पांच मैच में से चार मैच नॉर्मल बच्चियों को हराकर जीती है. फाइनल में भी नॉर्मल बच्ची से मैच हारी है. 

जिला शिक्षा अधिकारी डॉ अनिल कुशवाहा का कहना है कि कनिष्का ने सिल्वर जीत कर मध्य प्रदेश का गौरव बढ़ाया है. कनिष्का नॉर्मल बच्ची नहीं है. ऐसे में नेशनल टूर्नामेंट में सिल्वर जीतना बड़ी बात है .

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