भारत सरकार के पूर्व अधिकारी चंद्रमौली राय की तीसरी किताब प्रकाशित हो गई है. 'चंद्रमौलिका', और ‘परिणाम’ के बाद अब लेखक ने ‘मृगतृष्णा’ लिखी है. 'चंद्रमौलिका' की कविता-कहानियों के किरदारों में जहां उनके करीबियों की झलक दिखी वहीं परिणाम में उनकी कहानियों के किरदार आस-पड़ोस के लगे. मृगतृष्णा उनकी तीसरी किताब है लेकिन इसे पढ़ते वक्त आपको अहसास होता है कि आप ‘परिणाम’ से आगे की ही कोई किताब पढ़ रहे हैं.
मृगतृष्णा में तीन कहानियां मृगतृष्णा, अतीत, मरीचिका दी गई हैं. ये वास्तव में उच्च मध्यमवर्गीय परिवारों की कहानियां हैं. इनके किरदारों के पास वो सबकुछ है, जिनके होने पर किसी भी शख्स को कामयाब मान लिया जाता है. अच्छी नौकरी, पैसा, सम्मान, प्यार और परिवार लेकिन फिर भी ये किरदार संतुष्ट नहीं हैं. उनकी यही असंतुष्टि उन्हें मृगतृष्णा का शिकार बना देती है. वे एक अंधी दौड़ में भागते हैं और जब होश आता है तो खुद को हर तरफ से लुटा हुआ पाते हैं.
इन कहानियों की भाषा इतनी सहज है कि पढ़ते वक्त आपकी आंखों के सामने इनके किरदार और उनसे जुड़े दृश्य घूमने लगते हैं. आप इनसे खुद को जुड़ा हुआ पाएंगे. उनसे सहानुभूति रखेंगे और उनके लिए दुखी भी होंगे. कहीं ये कहानियां आपको भावुक करेंगी तो कहीं उनके किरदारों को लेकर आपको अफसोस भी होगा.
किताब में एक बात गौर करने वाली है. लेखक की तीनों ही कहानियों के किरदार महिला हैं. ऐसी महिलाएं जो किसी न किसी वजह से अपनी शादी से खुश नहीं हैं. उनकी ये नाखुशी उन्हें ऐसी राह पर ले जाती है जहां पछताने के सिवाय उनके पास कोई रास्ता नहीं रहता.
दूसरी ओर इन तीनों कहानियों के मुख्य पुरुष किरदार संस्कारी हैं. जिनके पास पैसा है, कामयाबी है लेकिन वे पारिवारिक मूल्यों को लेकर समर्पित हैं. मृगतृष्णा पूरी तरह विवाह की संस्था का सम्मान करने की सीख देती लगती है. इसमें कहानियां भले ही अलग अलग हों, लेकिन किरदारों में एकरूपता झलकती है. ये किताब की खामी है या खूबी इसका फैसला पाठक करें. किताब को रिगी प्रकाशन ने प्रकाशित किया है. 52 पेजों की ये किताब का पेपरबैक संस्करण 120 रुपये में उपलब्ध है.
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पुस्तक: मृगतृष्णा
लेखक: चंद्रमौली राय
विधाः कहानी संग्रह
भाषाः हिंदी
प्रकाशक: रिगी प्रकाशन
मूल्य: 120 रुपए
पृष्ठ संख्याः 52
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