Women Equality Day: लड़कियों के पास आज भी नहीं लड़कों जैसे 5 अधिकार

26 अगस्त को हर साल वूमेन इक्विलिटी डे सेलिब्रेट किया जाता है. इसके बावजूद भारत में आज भी महिलाओं को कई मामलों में पुरुषों जैसे अधिकार नहीं मिलते.

प्रतिकात्मक तस्वीर
सुमित कुमार/aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 12:44 PM IST

महिलाओं के अधिकारों का संरक्षण और उन्हें समाज में समान दर्जा दिलाने के उद्देश्य से 26 अगस्त को हर साल वूमेन इक्विलिटी डे सेलिब्रेट किया जाता है. 1973 से लगातार इस दिवस को मनाया जा रहा है, इसके बावूजद भारत में आज भी महिलाओं को कई मामलों में पुरुषों जैसे अधिकार नहीं मिलते.

1. पुरुषों की तरह महिलाओं को भी अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने का अधिकार होना चाहिए. इसके बावजूद रूढ़ीवादी परिवारों में महिलाओं को इसकी स्वतंत्रता नहीं है. आज भी कई परिवारों में लड़के बेझिझक अपनी पसंद जाहिर करते हैं, लेकिन लड़कियों से इस बारे में खुलकर बात तक नहीं की जाती है.

2. लड़कियों को क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं, इसका फैसला लड़कियों से ज्यादा समाज के ठेकेदार करने लगे हैं. कई इलाके तो ऐसे भी हैं जहां जींस, टॉप, टी-शर्ट पहनने वाली महिलाओं को सम्मान नहीं दिया जाता.

3. एक पिता के लिए लड़का और लड़की दोनों समान होते हैं, फिर क्यों उनके देहांत के बाद प्रॉपर्टी पर पूरा अधिकार सिर्फ लड़कों का होता है. पिता की जायदाद में लड़कियों की हिस्सेदारी के लिए कानून बनाया गया है, लेकिन इसके बावजूद कई परिवार इस पर अमल नहीं करते.

4. लड़के अक्सर अपना मूड फ्रेश करने के लिए दोस्तों के साथ या सोलो ट्रैवलिंग पर जाते हैं, लेकिन लड़कियों का घर से बाहर घूमना कई परिवारों में आज भी पसंद नहीं किया जाता. अंत में उसे अपने अरमान दबाकर घर की चारदीवारी में ही कैद रहना पड़ता है.

5. हमारे समाज में ऐसे कई रीति-रिवाज हैं जिनसे महिलाओं को वंचित रखा जाता है. इन रीति-रिवाजों के लिए सिर्फ पुरुषों के विशेष समाज को ही इजाजत होती है.

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