हिंदू धर्म में हरियाली तीज का विशेष महत्व है. यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती से संबंधित है. महिलाएं आज 3 अगस्त को यह पर्व मना रही हैं. इस व्रत की खासियत यह है कि इस दिन महिलाएं अपने श्रृंगार में हरे रंग को खासा महत्व देती हैं. हरी रंग की चूड़ियों से लेकर साड़ी सब हरे रंग में रंगा नजर आता है. लेकिन इसके पीछे की वजह क्या है, आइए जानते हैं.
पति से है संबंध-
हिंदू धर्म में कुछ खास रंगों को सुहाग का प्रतीक माना जाता है. इन्हीं रंगों में से एक हरा रंग भी इस लिस्ट में शामिल है. इस रंग को जीवन और खुशियों से जोड़कर देखा जाता है. सुहागिन स्त्रियां हरे रंग की चूड़ियां अपने पति की खुशहाली, तरक्की और सेहतमंद लंबे जीवन के लिए पहनती हैं.
आंखों को देता है राहत-
प्रकृति का यह हरा रंग आंखों को ठंडक पहुंचाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में महिलाओं को हरे रंग की चूड़ियां और हाथों में मेंहदी भी लगानी चाहिए.
प्रकृति से है संबंध-
सावन को प्रकृति की सौंदर्यता से जोड़कर देखा जाता है. जबकि शास्त्रों में स्त्री की तुलना प्रकृति से की जाती है. यही वजह है कि प्रकृति की हरियाली की तरह महिलाएं भी इस पर्व के आने पर अपने जीवन में उमंग और स्फूर्ति बनाए रखने के लिए इस रंग का प्रयोग करती हैं. सावन माह के दौरान पड़ने वाले कजरी तीज, हरियाली तीज और रक्षा बंधन जैसे त्योहारों पर महिलाएं हरी मेंहदी,हरी चूड़ियां, वस्त्र और बिंदी का प्रयोग करती हैं.
वैज्ञानिक कारण-
हरे रंग को शक्ति का प्रतीक माना जाता है. यह प्रजनन क्षमता का भी प्रतीक है. आयुर्वेद में इस रंग को कई तरह के रोगों के उपचार में कारगर माना गया है. यह भी एक कारण है कि सावन में हरे रंग को श्रृंगार में शामिल किया जाता है.
धार्मिक मान्यता-
धार्मिक ग्रंथों में हरे रंग को बुध ग्रह का प्रतीक माना जाता है. हरा रंग धारण करने से बुध प्रबल होने के साथ संतान सुख की कामना पूरी होती है. इस दिन महिलाएं व्रत और पूजा के साथ-के साथ-साथ सोलह श्रृंगार भी करती हैं.