दक्षिण कोरिया में महिलाएं अपने मेकअप कलेक्शन को बर्बाद कर रही हैं, आईशैडो चमक भरी धूल में बदल गया है, नेल पॉलिश की डिब्बियां खाली की जा रही हैं और लिपिस्टिक के टुकड़े-टुकड़े कर कूड़े में फेंके जा रहे हैं.
(तस्वीर-इंस्टाग्राम)
सोशल मीडिया पर कई ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं. दरअसल, दक्षिण कोरिया में Escape The Corset नाम से एक फेमिनिस्ट मूवमेंट शुरू हुआ है. युवा लड़कियां खूबसूरती के उन कड़े पैमानों के खिलाफ विद्रोह कर रही है जो उनके देश में एक जरूरी कायदा बन चुका है. वे अपने कॉस्मेटिक्स और स्किन केयर के ढेर सारे उत्पादों को कचरे की तरह फेंक रही हैं, पार्लर में जाकर बाल छोटे करवा रही हैं. इन सबके पीछे बस एक ही कोशिश है- खूबसूरती के पैमाने पर महिलाओं के लिए प्रदर्शन के भारी दबाव को खत्म करना.
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दक्षिण कोरिया में महिलाओं को खूबसूरत दिखने के मामले में कोई छूट नहीं है. दक्षिण कोरिया दुनिया के 8 बड़े कॉस्मेटिक्स बाजार में शामिल है और वैश्विक बिक्री में 3 फीसदी की अकेले की भागीदारी है. यही वो देश हैं जहां 10 स्टेप स्किन केयर महिलाओं की जीवनशैली का हिस्सा है. 2012 से 2017 के बीच, दक्षिण कोरिया के कॉस्मेटिक्स बाजार में सालाना 7 फीसदी की दर से वृद्धि हुई है. दक्षिण कोरिया ही BB और CC क्रीम्स के लिए जिम्मेदार है.
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लेकिन अब शायद वक्त ने पलटी मारी है और महिलाएं हर रोज मेकअप पर घंटों का वक्त खर्च करके थक चुकी हैं. केवल समय की ही खपत ही नहीं बल्कि सुंदर दिखने की कीमत एक बड़ी आर्थिक चोट के तौर पर भी चुकानी पड़ रही है. MAC की एक लिपिस्टिक की कीमत 26 डॉलर है जोकि यहां के प्रति घंटे के न्यूनतम मजदूरी का 4 गुना है.
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मेकअप की तुलना कॉरसेट से की गई है क्योंकि दोनों ही महिलाओं की असली अपीयरेंस को छिपाता है. दक्षिण कोरिया में पितृसत्तात्मक समाज के मूल्य ज्यादा हावी रहे हैं और यहां खूबसूरती को महिलाओं के करियर और रिलेशनशिप में सफलता के लिए अनिवार्य शर्त माना जाता है.
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यहां सुंदरता के इतने कड़े पैमाने बना दिए गए हैं कि महिलाएं हर रोज लगभग
घंटों मेकअप करने में गुजारती है. यही नहीं, सुबह ऑफिस जाने के दो घंटे
पहले उठना और 10 स्टेप लंबे स्किनकेयर फॉलो करना उनकी मजबूरी है.
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'द गार्जियन' को दिए इंटरव्यू में एक कोरियाई महिला चा जी वॉन ने बताया कि वह हर महीने कॉस्मेटिक्स पर (100,000 won) 88 डॉलर खर्च कर रही थीं. चा जी ने कहा, 'अब और नहीं, हर रोज किसी शख्स की मानसिक ऊर्जा बहुत कम होती है और मैं अपनी सबसे ज्यादा ऊर्जा खूबसूरत दिखने की चिंता में ही लगा देती हूं.'
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कभी लग्जीरियस माने जाने वाला मेकअप कलेक्शन अब कूड़े में बदल चुका है. एक महिला ने लिखा, मुझे तो यह समझ में नहीं आ रहा है कि बिना मेकअप पर खर्च किए मैं अपना पैसा कहां खर्च करूंगी?
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हर घंटे लिपिस्टिक लगाने वाली एक कोरियाई महिला लिखती हैं, 'मुझे खूबसूरत चीजें पसंद थी और मैं सुंदर दिखना चाहती थी. मुझे अपने बदसूरत चेहरे से नफरत थी. अगर मेरा मेक-अप अच्छा नहीं हो पाता था तो मैं स्कूल ही नहीं जाती थी. लेकिन अब मुझे एहसास हो गया है कि मुझे खूबसूरत दिखने की जरूरत नहीं है, मैंने अब उस मास्क को उतार फेंक दिया है जो मेरी जिंदगी को तबाह कर रहा था.'
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रिटेल रिसर्चर्स मिंटेल के मुताबिक, दक्षिण कोरिया में ब्यूटी इंडस्ट्री बहुत ज्यादा बड़ी है. इसकी कीमत करीब 10 बिलियन £ (9,20,95,80,93,75 रुपए) है. यहां तक कि सियोल वैश्विक तौर पर प्लास्टिक सर्जरी का गढ़ बन चुका है.
ब्यूटी यूट्यूबर लीना बे के एक वीडियो पर 50 लाख से ज्यादा व्यूज आ चुके हैं. वह वीडियो में अपने नकली आईलैशेज निकालते हुए कहती हैं- 'मैं खूबसूरत नहीं हूं.'
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बिना मेकअप के आप बहुत भयावह लगती हैं. आपकी स्किन वैसी नहीं है, जैसी महिलाओं की होनी चाहिए.
स्क्रीन पर ऐसे ही कुछ कॉमेंट दिखते हैं और फिर लीना अपने चेहरे से फाउंडेशन को हटाती हैं. वह कहती हैं- मैं सुंदर नहीं हूं लेकिन कोई बात नहीं, आप जैसे हैं, वैसे ही खास हैं.
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मई में एक कोरियन न्यूज ऐंकर के लुक पर काफी बहस छिड़ गई थी. बात बस इतनी
सी थी कि पहली बार कोई न्यूज ऐंकर चश्मा पहनकर आई थी. इसके बाद खूबसूरती की
अवास्तविक मांगों को लेकर चर्चा शुरू हो गई.
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यहां सड़कों पर,
टॉयलटों में अवैध तरीके से फिल्मिंग और यौन उत्पीड़न आम बात है. यह मूवमेंट
महिलाओं के समानता के अधिकार के लिए भी है.
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