'मैं ऊब गया संसार के खेलों में...', प्रेमानंद महाराज से रेसलर रिंकू राजपूत ने कही थी ये बात, फिर बन गए शिष्य

WWE रेसलर रिंकू राजपूत जो अमेरिका में 5 साल तक रेसलिंग कर चुके हैं, अब वृंदावन के प्रेमानंद महाराज के शिष्य बन गए हैं. उन्होंने अध्यात्म का रास्ता कैसे अपनाया, उनका प्रेमानंद महाराज से क्या वार्तालाप हुआ था, इस बारे में आर्टिकल में जानेंगे.

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रिंकू राजपूत करीब डेढ़ साल से प्रेमानंद महाराज के साथ हैं. (Photo: Instagram/realrinkurajput) रिंकू राजपूत करीब डेढ़ साल से प्रेमानंद महाराज के साथ हैं. (Photo: Instagram/realrinkurajput)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:45 PM IST

वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज के कई शिष्य हैं जो उनके आसपास अंग-रक्षक की तरह रहते हैं. उनके शिष्यों में पिछले कुछ समय से WWE रेसल रिंकू राजपूत का नाम भी जुड़ गया है. 5 साल तक अमेरिका में रेसलिंग करने वाले रिंकू को रिंग में वीर महान नाम से जाना जाता था. वह अब प्रेमानंद महाराज के साथ ही रहते हैं और उनके शिष्य बन गए हैं. उन्होंने प्रेमानंद महाराज के साथ फोटो भी इंस्टाग्राम पर शेयर की है. लेकिन अक्सर लोग जानना चाहते हैं कि आखिर रिंकू ने अचानक से अध्यात्म का रास्ता कैसे अपनाया. दरअसल, वे कई बार प्रेमानंद महाराज के आश्रम उनके दर्शन के लिए पहुंचे और उनसे बात की जिनके वीडियो उन्होंने इंस्टाग्राम पर भी शेयर किए हैं.

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प्रेमानंद महाराज से ये वार्तालाप

रिंकू जब 2 साल पहले महाराज के पास पहुंचे थे तो उन्होंने उनसे पूछा था, 'महाराज जी मैं पिछले कुछ समय से आपका सत्संग सुन रहा हूं. अभी पिछले 5 साल से अमेरिका में रेसलर हूं. अब माता-पिता इस दुनिया में नहीं रहे. लेकिन महसूस होता है कि मैं उनकी भक्ति नहीं कर पाया. गुरुदेव आप मेरे सपने में आए थे और नाम दिया. अभी मेरे मन में सवाल आ रहा है कि मैं अमेरिका में रहकर रेसलिंग करूं या भारत आकर भक्ति करूं और भारत भूमि की सेवा करूं? महाराज जी कुछ समझ नहीं आ रहा है, कृपया मार्गदर्शन करें.'

प्रेमानंद महाराज ने कहा था, 'हमारी दृष्टि में चाहे अमेरिका हो या भारत, हमारे ठाकुर जी ही अलग-अलग रूपों में खेल रहे हैं. दूसरा कोई है नहीं. शरीर बल टिकाऊ चीज नहीं है. आज है, कल शरीर नहीं रहेगा. आज शरीर स्वस्थ है, कल अस्वस्थ भी होगा क्योंकि ये मरणधर्मा शरीर है, परिवर्तनशील है.'

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'महाबल भगवान का आश्रय है. हमारे ठाकुरजी ने 7 वर्ष की अवस्था में 7 दिन, 7 रात तक गिरिराज जी को उंगुली पर उठाए रखा था. है कोई इनसे शक्तिशाली भला?'

'105 फन वाले कालिया नाग की देह का मर्दन किया था और अपने श्रीअंग के स्पर्श से पूरे जल को अमृतमय कर दिया था. ऐसा कोई है?'

हर जगह भगवान हैं

महाराज ने आगे कहा, 'जहां भी हो वहीं भगवान हैं. सर्वत्र भगवान हैं तो वहां (अमेरिका) भी तो भगवान हैं. सबके भगवान हैं तो आपके भी हैं. जहां भी हो आप तो भगवान के हो. जो बल जो आपकी बुद्धि दी है समाज सुख में लगाओ, समाज सेवा में लगाओ. जिसमें दूसरों को लाभ मिले, सुख मिले, आनंद मिले, भले ही हमें पीड़ा मिले कोई बात नहीं, पर दूसरों को सुख मिले, इसको धर्म कहते हैं और धर्म का फल होता है श्री हरि के चरणों में भक्ति हो जाना यही सब का फल है. नाम जप करो, व्यसन मत करो, बुरे आचरणों से बचो.'

प्रेमानंद महाराज ने रिंकू से पूछा, ठीक हो? और शरीर ठीक है, मन ठीक है? तो उन्होंने कहा कि मन ठीक नहीं है. मैं भगवत प्राप्ति करने के लिए सबकुछ छोड़कर आना चाहता हूं.

प्रेमानंद महाराज ने कहा, 'सच मानिए प्रदर्शन के द्वारा अर्थ की प्राप्ति और नाम हो सकता है लेकिन लेकिन आप भगवान को नहीं जाने तो सब व्यर्थ हो जाएगा. जैसे भजन नहीं किया तो फिर ये नाम कीर्ति कितने दिन रहेगी? संसार राम-कृष्ण को याद नहीं करना चाहता तो और किसको याद करेगा? तो बुद्धिमानी तो यही है कि लोक यश प्राप्त कर लिया, अपनी धाक जम गई तो अब परलोक में भी जमाएं तब तो बात जम पाएगी, नहीं तो आपके पास जो कुछ है सब यहीं का है.'

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आज्ञा दे देते तो यहीं आ जाता

रिंकू फिर जब प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे थे तो उन्होंने प्रेमानंद महाराज से कहा था, गुरुदेव आज्ञा दे देते तो मैं यहीं आ जाता. तब प्रेमानंद महाराज ने हंसते हुए कहा था, 'अब हम भी चाहेंगे कि हमारे देश का जितना नाम रोशन कर सकें आप करें. आप देश के प्रतीक बनेंगे. आप अपने बल को बढ़ाएं, भाव को बढ़ाएं और दिखाई दे कि भारत में भी वीर हैं, भारत में भी बलवान हैं.'

'ऐसे बल को जागृत कीजिए तो आप जहां भी हैं, भारत की जय होगी. मतलब बाहर कहीं भी हों तो यही कहते होंगे कि ये भारतीय है. तो पूरे भारत की बाजी आपके ऊपर है जैसे क्रिकेट का खेल हो या कोई भी खेल हो.'

'आपकी जीत हमारे देश की जीत है. संयम से रहो और जब आपको लगे कि मैं ऊब गया संसार के खेलों में तो आ जाओ बढ़िया आनंद पूर्वक भजन करो, जीवन भगवान को समर्पित कर दो.'

रिंकू ने कहा, महाराज ऐसा लगने लगा है तो महाराज ने आगे कहा, 'बड़ी कृपा है. अगर संसार के खेलों से ऊबने लगे तो फिर दिव्य भगवान की प्राप्ति के मार्ग में चला जाए. जीवन का लाभ यही है, अब आप देख लो.'

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