मोटापे की समस्या पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ती जा रही है जिससे भारत भी अछूता नहीं है. एक स्टडी की मानें तो अगर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो साल 2025 तक 60 फीसदी वयस्क और हर तीन में से एक बच्चा मोटापे का शिकार हो सकता है.
लैंसेट मेडिकल जर्नल में छपी इस स्टडी में 204 देशों के आंकड़ों का उपयोग किया गया. अमेरिका स्थित इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (आईएचएमई) की लीड ऑथर इमैनुएला गाकिडोउ ने एक बयान में कहा, "अधिक वजन और मोटापा एक गंभीर त्रासदी और एक बड़ी सामाजिक विफलता है."
स्टडी में पाया गया कि 1990 में ओवरवेट और मोटापे के शिकार लोगों की संख्या 929 मिलियन थी जो 2021 में बढ़कर 2.6 बिलियन हो गई.
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यदि कोई गंभीर बदलाव नहीं किया गया तो आने वाले 15 सालों में 3.8 बिलियन एडल्ट्स ओवर वेट या मोटापे से ग्रस्त हो जायेंगे. शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि दुनिया का हेल्थ सिस्टम अत्यधिक दबाव में आ जाएगा, क्योंकि उस समय तक दुनिया के लगभग एक-चौथाई मोटे लोग 65 वर्ष से अधिक उम्र के होंगे.
रिसर्चर्स ने यह भी अनुमान लगाया कि बच्चों में भी मोटापे की इस समस्या में 121 फीसदी की बढ़ोतरी देखा जा सकती है.
रिसर्चर्स का कहना है कि अभी भी देर नहीं हुई है. डाइट और ग्लोबल फूड सिस्टम में कुछ बदलाव करके इस आंकड़े को बढ़ने रोका जा सकता है. साथ ही जरूरी है कि लोगों के पोषण, फिजिकल एक्टिविटी और आसपास के माहौल में बदलाव किया जाए.
स्टडी में कहा गया है कि दुनिया के आधे से ज्यादा ओवर वेट या मोटापे से ग्रस्त वयस्क सिर्फ आठ देशों - चीन, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजील, रूस, मेक्सिको, इंडोनेशिया और मिस्र में रहते हैं.
कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के रिसर्चर थोरकिल्ड सोरेंसन ने कहा कि खराब लाइफस्टाइल और डाइट मोटापे की महामारी के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन इसके इसके पीछे के और भी कारणों के बारे में पता लगाना जरूरी है.
आजतक हेल्थ डेस्क