3 घंटे धीमी आंच और मसालों की पोटली...अरशद वारसी ऐसे बनाते हैं मटन बिरयानी

अरशद वारसी 'द लल्लनटॉप' न्यूजरूप पहुंचे जहां उन्होंने अपनी पसंदीदा बिरयानी की रेसिपी के साथ ये भी बताया कि वो बिरयानी बनाते समय किन चीजों का ध्यान रखते हैं जिससे जायका बढ़ जाता है.

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अरशद वारसी ने बैचलर लाइफ में बिरयानी बनानी सीखी थी. (Photo: Instagram/arshad_warsi & Pixabay) अरशद वारसी ने बैचलर लाइफ में बिरयानी बनानी सीखी थी. (Photo: Instagram/arshad_warsi & Pixabay)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 05 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:25 PM IST

Biryani recipe according to arshad warsi: बिरयानी सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक लजीज हिस्सा है. इतिहासकारों का मानना है, यह डिश फारस (ईरान) से आक्रमणकारियों और व्यापारियों के साथ भारत तक पहुंची थी. भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीके से बिरयानी बनाई जाती है लेकिन चावल, मसाले और मांस या सब्जी इसका मुख्य हिस्सा होते हैं. यह एक फुल मील डिश होती है जिसकी खुशबू मात्र से भी भूख जग जाती है. हाल ही में एक्टर अरशद वारसी 'द लल्लनटॉप' न्यूजरूप पहुंचे जहां उन्होंने अपनी पसंदीदा बिरयानी की रेसिपी बताई.

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बैचलर लाइफ से बना रहे बिरयानी

अरशद वारसी ने इंटरव्यू के दौरान बताया, 'हां, मैं बिरयानी काफी अच्छी बनाता हूं. दरअसल, खाने का शौक है. जब बैचलर लाइफ होती है, जब अकेले रहते हैं तो सबसे पहले वही चीज सीखनी पड़ती है कि अंडे कैसे बनते हैं, बिरयानी कैसे बनती है. वहां से थोड़ा शौक बढ़ गया. खाने का शौक तो था ही फिर उसके बाद बनाना और पकाना भी समय के साथ चलता रहा और अभी भी दोस्तों के लिए बनाता हूं.'

अरशद वारसी की सीक्रेट रेसिपी

अरशद वारसी ने अपनी बिरयानी की सीक्रेट रेसिपी बताते हुए कहा, 'मुझे बिरयानी में मसाले काफी पसंद हैं लेकिन खाते वक्त बीच में साबुत मसाले (जैसे इलायची या लौंग) आ जाते हैं मुझे वो पसंद नहीं है. मसालों का फ्लेवर उसका स्वाद आना चाहिए वो मुंह में नहीं आना चाहिए क्योंकि वो बहुत स्ट्रांग होते हैं वो उस निवाले को खराब कर देते हैं. मैं मैं जो करता हूं, उसमें आपको मसाले मुंह में नहीं आएं और जो भी आपकी प्लेट में है आप वो सब खा सकते हैं, कुछ भी मुंह से निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी. मैं मसालों को कपड़े की पोटली में डलता हूं ताकि उनका स्वाद भी आ जाए और मुंह में भी न आएं.'

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3 या साढ़े तीन घंटे पकाते हैं

अरशद ने कहा, 'जब मैं मटन बनाता हूं तो उसको करीब तीन साढ़े तीन घंटे तक बनाता हूं. वो इतना नरम हो जाता है, इतना मजेदार होता है और उसमें तेल नहीं होता तो वह अपने ही ऑयल/फैट (Natural Oil) में पकता है. मैं उसे करीब 20 मिनट तक पकाता हूं और फिर पानी डालने के बाद फिर उसको मैं कुछ तीन घंटे के लिए पकाता हूं. कम हीट और बढ़िया आराम से बनाने पर तो उसकी हड्डी तक बाहर आने लगती है, इतना सॉफ्ट हो जाता है.'

मटन के लिक्विट में ही चावल

अरशद बताते हैं कि उनके चावल बनाने का तरीका भी सामान्य नहीं है. वह चावल को वह उसी ग्रेवी के लिक्विड (अर्क) में तैयार करते हैं, जिससे चावल का एक-एक दाना खुशबू और स्वाद से भर जाता है और ऐसा नहीं लगता कि मटन अलग है और चावल अलग.'

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