उत्तराखंड के 5 जिलों में जल्द से जल्द पेंडिंग मामलों के निपटारे के लिए मोबाइल कोर्ट शुरू होने जा रही है. 15 अगस्त के दिन स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उत्तराखंड हाईकोर्ट के कैम्पस से इन मोबाइल वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे.
दरअसल, उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से न्याय मिलने में देरी हो जाती है. पीड़ितों को अदालत में पहुंचने में आने वाली बाधाओं और कठिनाइयों की वजह से भी न्याय मिलने में सालों लग जाते हैं. जल्दी न्याय के लिए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राघवेंद्र सिंह चौहान की पहल पर 5 जिलों में 5 मोबाइल ई-कोर्ट का संचालन शुरू किया जा रहा है.
मोबाइल ई-कोर्ट वैन पूरी तरह सुविधाओं से लैस होगी. इसमें कोर्ट रूम से लेकर प्रिंटर, कंप्यूटर सहित इंटरनेट और अन्य जरूरी उपकरण भी होंगे. ई-कोर्ट में संभव होने पर मौके पर ही मामले का निपटारा किया जा सकेगा.
मोबाइल ई-कोर्ट के संचालन की जिम्मेदारी उन जिलों के जिला जज की होगी. जिला जज ही तय करेंगे कि मोबाइल वैन को दूरदराज के किन क्षेत्रों और किन मामलों के निपटारे के लिए भेजा जाए.