शादीशुदा महिला के कानूनी अधिकार क्या हैं? इन हालातों में सास-सुसर कर सकते हैं घर से बाहर!

शादीशुदा महिला को भारत का कानून कई अधिकार देता है. शादी के तुरंत बाद कुछ अधिकार ऑटोमेटिक मोड से ही बहू को मिल जाते हैं. लेकिन इनके बारे में जानकारी का आभाव है. अधिकतर महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति अनजान, उदासीन और लापरवाह होती हैं.

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शादीशुदा महिला को कानून कई अधिकार देता है (सांकेतिक तस्वीर) शादीशुदा महिला को कानून कई अधिकार देता है (सांकेतिक तस्वीर)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 22 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 7:30 PM IST

शादी के फेरे होते ही और एक चुटकी सिंदूर मांग में पड़ते ही युवती का दर्जा बदल जाता है, उसकी पहचान बदल जाती है. पति की अर्द्धांगिनी बनने के साथ-साथ उसकी जिम्मेदारियों की लिस्ट भी बढ़ जाती है. लेकिन इन जिम्मेदारियों के साथ-साथ ही उसे कई तरह के अधिकार भी मिलते हैं.

लड़की को शादी के बाद क्या-क्या अधिकार ऑटोमेटिक मोड से ही मिल जाते हैं उनके बारे में आज हम आपको बताएंगे. वैसे अधिकतर महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति अनजान, उदासीन और लापरवाह होती हैं. ऐसे में जानकारी उनको सशक्त करने में मदद कर सकती है.

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सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट विष्णु शंकर जैन से इस बारे में हमने बात की. उन्होंने बताया कि पत्नी और बच्चों के जीवनयापन यानी भोजन, सुरक्षा, शिक्षा, चिकित्सा सहित सभी जिम्मेदारी पति पर होती है. वो इससे इनकार नहीं कर सकता क्योंकि ये तो महिला का पत्नी के रूप में अधिकार है.

स्त्रीधन क्या है, जिसे बांटा नहीं जा सकता

स्त्री धन को स्त्री अपने पास सुरक्षित और संरक्षित (preserve and protect) रख सकती है. उसमे कोई उसकी मर्जी के बगैर हिस्सा नहीं बांट सकता. चाहे वो कितना भी नजदीकी रिश्तेदार क्यों न हो. स्त्रीधन दरअसल सगाई के साथ ही होने वाली बहूरानी को मिलने वाला शगुन, तोहफे, मुंह दिखाई, रस्मो रिवाज के दौरान मिलने वाला धन या नकद होता है.

घरेलू हिंसा निवारण अधिनियम की धारा 18 से 23 के बीच पत्नी के अधिकारों का विस्तार से वर्णन किया गया है. सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भी पत्नी को मान-सम्मान के साथ पति के घर में रहने का अधिकार है.

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जस्टिस एसएन ढींगरा के फैसले में साफ कहा गया है कि तलाक लेने वाली पत्नी अगर नहीं कमाती तो वो पति की कमाई में से भरण-पोषण के लिए धन राशि पाने की हकदार है. अपने नैसर्गिक अधिकार के तहत महिला पति के घर यानी ससुराल में रह सकती है. बच्चे हों तो उनको भी रहने, भोजन, कपड़े, शिक्षा, चिकित्सा आदि के भी हकदार हैं. चल-अचल संपत्ति को भी संरक्षित, सुरक्षित रखने का हक उसे मिला हुआ है.

सास-ससुर कर सकते हैं घर से बाहर, अगर...

पुश्तैनी घर या अचल संपत्ति में भी उसका हक कानूनी तौर पर बनता है, लेकिन तभी जब बहू के रूप में वो बुजुर्ग सास ससुर या अन्य बुजुर्गों की सेवा करे. अगर वो अपना ये दायित्व निभाने में अक्षम रहती है तो सास-ससुर उसे घर से बाहर भी कर सकते हैं.

अभी हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बुजुर्ग दंपति (मां-बाप) पर खूंखार कुत्ता छोड़ने वाले दरिंदे बेटे और बहू को घर से बाहर करने का हुक्म दिया.

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