जामिया हिंसा: बरी किए आरोपियों के मामले में सुनवाई पूरी, हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

दिल्ली में 2019 के जामिया नगर हिंसा मामले में पुलिस ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष निचली अदालत के आदेश का विरोध किया है. दिल्ली पुलिस ने कहा कि हिंसा मामले में जेएनयू के छात्र शरजील इमाम और स्टूडेंट वर्कर आसिफ इकबाल तन्हा और सफूरा जरगर को आरोप मुक्त करने का निचली अदालत का आदेश गलत है. पुलिस ने यह भी कहा कि निचली अदालत की टिप्पणी को हटाया जाना चाहिये.

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दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले में सुनवाई की है. (फाइल फोटो) दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले में सुनवाई की है. (फाइल फोटो)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 23 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 11:17 PM IST

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ 2019 में जामिया हिंसा केस में बरी किए आरोपियों के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने जेएनयू के छात्र शरजील इमाम, सफूरा जरगर समेत अन्य आरोपियों को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है. हाई कोर्ट ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है.

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दिल्ली पुलिस ने कहा कि निचली अदालत ने जांच एजेंसी के खिलाफ टिप्पणियां पारित करके उसके क्षेत्राधिकार का उल्लंघन किया है. निचली अदालत की टिप्पणी को हटाया जाना चाहिये. दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कुछ वीडियो क्लिप चला कर कहा कि अगर इस वीडियो क्लिप के आधार पर निचली अदालत उन छात्रों को बेगुनाह कह रही है तो हम उसका विरोध करते हैं. 

CDR के आधार पर आरोप नहीं लगा सकते हैं

दिल्ली पुलिस ने कहा कि तीसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में घायलों के बयान हैं, जिन्होंने आरोपियों की पहचान की है. शरजील इमाम के वकील ने कहा कि कोई वीडियो या किसी गवाह का बयान मेरे खिलाफ नहीं है, मेरे खिलाफ चार्जशीट में एक शब्द भी नहीं है. उसके खिलाफ ऐसा कोई बयान नहीं है जो मेरे ऊपर आरोप को साबित करता हो. सफूरा जरगर के वकील ने कहा कि दिल्ली पुलिस जिस वीडियो क्लिप की बात कर रही है उसमें मेरी पहचान उजागर नहीं है. आज तक पहचान उजागर नहीं हुई है, क्योंकि उस क्लिप में शख्स ने चेहरा ढंका हुआ है. CDR के आधार पर मेरे ऊपर आरोप नहीं लगाया जा सकता है. घटना स्थल से 3-4 किलोमीटर दूर मेरा घर है.

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'किसी पुलिस ने मेरी पहचान भी नहीं की है'

सफूरा जरगर के वकील ने कहा कि 14 दिसंबर को FIR दर्ज की गई, उसमें भी मेरा नहीं था. चार्जशीट में भी मेरा नाम शामिल नहीं है. चार्जशीट सिर्फ मोहम्मद इल्यास के खिलाफ दाखिल की गई है. उस चार्जशीट में कहा गया कि मामले में दूसरे छात्रों के खिलाफ भी जांच की जा रही है. किसी पुलिसवाले ने मेरी पहचान भी नहीं की है. दूसरे आरोपियों की तरफ से पेश वकील ने कहा कि मैन चार्जशीट में 23 लोगो के स्टेटमेंट दर्ज हैं, उनमें से किसी ने मेरे बारे में कुछ नहीं कहा. 

उन्होंने कहा- दंगे हुए, इसलिए पुलिस कह रही है कि वह दंगाई थे. वहां पर गैरकानूनी जमावड़ा था, लेकिन पुलिस यह नहीं कह रही कि मेरे उपस्थिति में दंगा हुआ. बता दें कि दिसंबर 2019 में जामिया नगर इलाके में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों और पुलिस के बीच झड़प के बाद हिंसा भड़क गई थी. शरजील इमाम पर 13 दिसंबर 2019 को जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय में भड़काऊ भाषण देकर दंगे भड़काने का आरोप लगाया गया था. वो अभी भी जेल में है. वो 2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों की साजिश मामले में आरोपी है.

 

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