उत्तराखंड: सिर्फ धराली ही नहीं... सुक्खी टॉप में भी फटा बादल, मची भारी तबाही

उत्तरकाशी के धराली के अलावा एक जगह और बादल फटी, जगह - सुक्खी टॉप. ये जगह धराली से कुछ दूर पर स्थित है. गनीमत रही कि यहां बादल फटने से किसी शख्स की जान नहीं गई. धराली में तो इस आपदा ने अब तक चार लोगों की जान ले ली है.

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सुक्खी टॉप में भी बादल फटा (Photo: ITG) सुक्खी टॉप में भी बादल फटा (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 11:31 PM IST

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली में बादल फटने से आई आपदा ने तबाही मचा दी. इस आपदा में चार लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग लापता हो गए. धराली के अलावा एक और जगह बादल फटा, जिसकी चर्चा थोड़ी कम रही. धराली से थोड़ी दूर में स्थित 'सुक्खी टॉप' में भी बादल फटने की घटना हुई. हालांकि किसी की मौत नहीं हुई. 

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जिसने भी बादल फाड़ तबाही का ये मंज़र देखा है, उसके दिल में खौफ बैठ गया है. लोगों के जहन से तबाही का मंजर निकल नहीं पा रहा है. धराली गंगा नदी के तट पर बसा हुआ है. ये समुद्र तल से लगभग 2,700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और हिमालय की गोद में बसा होने के कारण, ये पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र है. 

धराली को मां गंगा का मायका यानी मुखबा के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि गंगोत्री मंदिर सर्दियों में बंद होने पर मां गंगा की मूर्ति को मुखबा गांव में लाया जाता है, जो धराली के पास है. और इसी धराली के खीर गंगा गांव में बादल फटने से जो तबाही आई, उसने पूरे खीर गंगा इलाके को मलबे में मिलाकर रख दिया है. हर कोई मां गंगा के रौद्र रूप से कांप उठा है. हर तरफ विनाश की तस्वीरें हैं.

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उत्तरकाशी के धराली को भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज़ से काफी संवेदनशील माना जाता है और इसके पीछे तीन बड़ी वजह हैं. यहां सामान्य से ज्यादा बारिश होती है. यहां की मिट्टी में तेज पकड़ नहीं है, जिसके कारण भूस्खलन यानी मिट्टी के दरकने से पहाड़ टूटने की घटनाएं ज्यादा होती हैं. और तीसरा बड़ा कारण ये है कि इंसानों ने यहां विकास के लिए पहाड़ों के सीने को अंदर तक खोद डाला है. इनमें भी गढ़वाल क्षेत्र ज्यादा प्रभावित हुआ है, जहां की मिट्टी और चट्टानों की संरचना ऐसी है कि ये भारी बारिश में आसानी से ढह सकती हैं. और इस घटना में भी ऐसा ही हुआ.

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