एक बार फिर कुदरत ने उत्तराखंड पर तबाही बरपाई है. चमोली जिले में रविवार सुबह ग्लेशियर टूटने से गंगा की सहायक नदी धौलीगंगा में बाढ़ आने से हर कोई सहम गया. हर एक के जेहन में 2013 केदारनाथ त्रासदी की खौफनाक यादें उभर आईं. श्रीनगर, ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे शहरों में अलर्ट जारी कर दिया गया.
हरिद्वार-ऋषिकेश में जो तीर्थयात्री या सैलानी घूमने पहुंचे हैं, उन पर भी इस घटना का असर दिखा. ऋषिकेश में तीर्थयात्रियों के अलावा बड़ी संख्या में सैलानी राफ्टिंग, कयाकिंग जैसी वाटर एडवेंचर और अन्य स्पोर्ट्स एक्टिविटीज के लिए पहुंचते हैं. इनमें अधिकतर संख्या युवाओं की होती है. ये गंगा के किनारे बने कैम्प्स और होटलों में रहना पसंद करते हैं. दिल्ली और आसपास के शहरों से वीकेंड पर बड़ी संख्या में लोग ऋषिकेश पहुंचते हैं.
चमोली से जैसे ही आज सुबह ग्लेशियर टूटने की खबर आई तो ऋषिकेश में कैम्प-होटल मालिकों, राफ्टिंग जैसी गतिविधियां चलाने वाले ऑपरेटर्स को फिर शंकाओं ने घेर लिया. इन सबकी यही प्रार्थना थी कि जल्दी ही इस त्रासदी पर काबू पा लिया जाए और जानमाल का नुकसान कम से कम रहे.
ट्रैवल यूएफओ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के युवा डायरेक्टर मनु त्यागी खुद जानेमाने ट्रैवल ब्लॉगर हैं. ऋषिकेश से 10 किलोमीटर की दूरी पर शिवपुरी में ‘स्टे इन कैम्प’ ऑपरेट करने वाले मनु कहते हैं कि कोरोना के झटके से बड़ी मुश्किल से थोड़ा थोड़ा उभरना शुरू किया है लेकिन चमोली में जो आज हुआ, ऐसी घटनाओं का असर हमें आने वाले कई दिनों तक भुगतना पड़ेगा. चाहे अधिक नुकसान न भी हो लेकिन लोगों के दिलों में ऐसी घटनाओं का खौफ काफी दिनों तक रहता है. इसे फियर साइकोसिस कहा जा सकता है.
मनु कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवन भर की पूंजी लगा कर 2019 में 33 स्थायी टेंट्स के साथ कैम्प शुरू किया. जनवरी 2020 तक उनके काम ने थोड़ा पटरी पर आना शुरू किया लेकिन मार्च 2020 में कोरोना महामारी ने दस्तक दे दी. मनु के मुताबिक “8 महीने लॉकडाउन की वजह से कारोबार पूरी तरह चौपट रहा. 18 लोगों के स्टाफ, किराए आदि पर अपनी जेब से हर महीने करीब ढाई लाख रुपए खर्च करने पड़े.
अक्टूबर में उत्तराखंड सरकार की ओर से लॉकडाउन की बंदिशें हटाना शुरू होने के बाद फिर राज्य में टूरिज्म एक्टिविटीज ने धीरे धीरे सही ही पटरी पर आना शुरू किया. इस साल के शुरू होने के बाद से बड़ी संख्या में सैलानियों-तीर्थयात्रियों के आने से उम्मीद बंधी कि इस गर्मियों में कारोबार अच्छा रहेगा. उसी हिसाब से होटल-कैम्प वालों ने सुविधाएं बढ़ाने पर भी निवेश किया. लेकिन चमोली की घटना से फिर कुछ दिनों तक कारोबार प्रभावित होने की आशंका है.”
ऋषिकेश में ‘एक्सप्लोर हिमालय एडवेंचर्स’ के डायरेक्टर मोर सिंह पिछले 18 वर्ष से राफ्टिंग, कयाकिंग जैसी एक्टिविटीज के बिजनेस में हैं. वो ऋषिकेश में राफ्टिंग की शुरुआत कराने वालों में से एक हैं. सिंह कहते हैं, “कोरोना से पहले भी लंबे समय तक राफ्टिंग जैसी एक्टिविटीज पर रोक लगी रहने की वजह से इस इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को बहुत नुकसान उठाना पड़ा था. लंबे समय तक रोक के बाद राज्य सरकार ने फिर इन एक्टिविटीज शुरू करने की छूट दी. कुछ समय तक कारोबार सही चला, फिर कोरोना आ गया.”
मोर सिंह के मुताबिक राफ्टिंग जैसी एक्टिविटीज के कारोबार पर सेफ्टी और मेंटनेंस आदि पर बहुत पैसा खर्च करना पड़ता है. कारोबार बंद भी हो तो भी ये खर्च उठाना पड़ता है. इसके अलावा स्टाफ की सारी जरूरतों का भी ध्यान रखना पड़ता है.
17 फरवरी से होना है कयाक फेस्टिवल
मनु त्यागी ये भी कहते हैं कि इसी महीने 17 से 19 फरवरी तक ऋषिकेश में कयाक फेस्टिवल का आयोजन तय है. उत्तराखंड सरकार ने कोरोना के बाद टूरिज्म को उभारने के लिए इसी महीने 16 और 17 फरवरी को टिहरी झील महोत्सव की भी घोषणा कर रखी है.
मनु त्यागी हों या मोर सिंह दोनों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में सही सूचना लोगों को जल्द तक जल्द पहुंचे, ये बहुत जरूरी है. इसके लिए सरकार को सिस्टम डेवेलप करने चाहिए. मनु त्यागी ने कहा, "क्योंकि ये सोशल मीडिया का दौर है, इसमें कई बार पुराने वीडियो भी ताजा बता कर शेयर किए जाने लगते हैं. इससे लोगों में खौफ फैलता है. इसका असर ऋषिकेश-हरिद्वार जैसी जगहों पर ही नहीं बल्कि पूरे भारत की टूरिज्म इंडस्ट्री पर इसका असर पड़ता है. लोग टूर ऑपरेटर्स से अपनी होटल और अन्य बुकिंग कैंसल कराने लगते हैं."
ऋषिकेश में टूरिज्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग गंगा मैया से यही प्रार्थना करते हैं कि सब कुछ नियंत्रण में रहे और आने वाले दिनों में कुंभ महोत्सव का आयोजन सुचारू रूप से हो. इसके अलावा कोरोना का प्रकोप पूरी तरह खत्म हो जिससे लोग फिर से बड़ी संख्या में पहाड़ों और अन्य पर्यटन स्थलों का रुख करें.
खुशदीप सहगल