तीन दिन में दूसरा हमला, आदमखोर बाघ ने ली मजदूर की जान, खौफ में जी रहे लोग

रामनगर के पाटकोट क्षेत्र में एक बार फिर टाइगर अटैक से एक श्रमिक की मौत हो गई. घटना के बाद इलाके में दहशत और वन विभाग के खिलाफ आक्रोश फैल गया. बीते तीन दिनों में यह दूसरी घटना है. वन विभाग ने अलर्ट जारी कर गश्त बढ़ा दी है और बाघ को पकड़ने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं.

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बाघ के हमले में एक की मौत.(Photo: Representational) बाघ के हमले में एक की मौत.(Photo: Representational)

राहुल सिंह दरम्वाल

  • रामनगर,
  • 05 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:32 PM IST

उत्तराखंड के रामनगर में एक बार फिर टाइगर अटैक की घटना ने इलाके में दहशत फैला दी है. रामनगर वन प्रभाग की कोटा रेंज के पाटकोट में बाघ के हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई. मृतक की पहचान बिहार से आए एक श्रमिक के रूप में हुई है.

रामनगर में फिर टाइगर अटैक

इस घटना के बाद पूरे गांव और आसपास के इलाकों में भय और आक्रोश का माहौल है. ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ नाराज़गी जाहिर करते हुए सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े किए हैं. घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग, प्रशासन और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची.

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मौके पर पहुंचे अधिकारियों को ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा. लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पहले से ही बाघ की मौजूदगी की आशंका थी, इसके बावजूद पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी नहीं की गई.

ग्रामीणों ने मांग की कि बाघ को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और प्रभावित परिवार को मुआवजा दिया जाए. वन विभाग ने स्थिति को संभालते हुए तत्काल इलाके में गश्त बढ़ा दी है. साथ ही, जंगल से सटे गांवों में अलर्ट जारी किया गया है.

तीन दिन में दूसरा हमला

विभाग की ओर से ग्रामीणों को सख्त चेतावनी दी गई है कि वो जंगल या उसके आसपास अकेले न जाएं, खासकर सुबह और शाम के समय, ताकि किसी और अनहोनी से बचा जा सके. रामनगर वन प्रभाग के डीएफओ ध्रुव मर्तोलिया ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. 

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उन्होंने कहा कि बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और उसे पकड़ने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं. वन विभाग की टीमें कैमरा ट्रैप और गश्ती दल के जरिए बाघ की लोकेशन ट्रैक कर रही हैं. गौरतलब है कि बीते तीन दिनों में यह बाघ के हमले की दूसरी घटना है. 

लगातार हो रहे हमलों से स्थानीय लोगों में डर के साथ-साथ आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं. 


 

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