उत्तराखंड में जारी कुंभ में कोरोना के कारण हड़कंप मच गया है. यहां 50 से अधिक साधु-संत कोरोना की चपेट में आ चुके हैं, जबकि बीते दिन एक संन्यासी का कोरोना के कारण निधन हो गया. अधिकतर समय अपने पालतू खरगोशों से घिरे रहने वाले 'खरगोश वाले बाबा' के नाम से मशहूर चित्रकूट के नागा संन्यासी महामंडलेश्वर कपिल मुनि का कोरोना के कारण निधन हो गया.
दरअसल, कपिल मुनि महाराज हरिद्वार महाकुंभ में शामिल होने मार्च के पहले हफ्ते में यहां अपने कैंप में आए थे. गुर्दे की खराबी से पीड़ित कपिल मुनि को कई अन्य बीमारियां पहले से भी थीं. हरिद्वार में खांसी बुखार से ग्रसित होने के बाद उनकी जांच कराई गई, कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी.
कोरोना रिपोर्ट आने के बाद उन्हें देहरादून के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज के दौरान 13 अप्रैल की रात करीब साढ़े दस बजे उनका निधन हो गया. बाबा का अंतिम संस्कार भी कोरोना गाइडलाइंस के तहत देहरादून में कर दिया गया था.
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‘खरगोश वाले बाबा’ कपिल मुनि महाराज
सनातन धर्म और परंपरा पर पूरी पकड़ रखने वाले महामंडलेश्वर नागा बाबा कपिल महाराज ने चित्रकूट जिले के नयागांव में हनुमान धारा पर अपनी आराध्या मां तारा का मंदिर और आश्रम बनवाया था. वह देश के अलग-अलग हिस्सों में अक्सर प्रवचन दिया करते थे.
कपिल मुनि महाराज को ‘खरगोश वाले बाबा’ के नाम से जाना जाता था. वो इसलिए क्योंकि वो जहां भी जाते थे, करीब दर्जनभर से ज्यादा खरगोश उनके साथ रहते थे. इसके अलावा ध्यान के वक्त भी उनके आस-पास खरगोश रहते थे. उनका कहना था कि खरगोश आस-पास रहने से ध्यान सही लगता है. इन खरगोशों के लिए खास तौर पर व्यंजन तैयार होते थे जिनमें फल, कच्ची सब्जी से लेकर मोमोज़ तक शामिल थे.
खरगोश से पहले कपिल मुनि के आश्रम में सांप, बंदर और उत्तम नस्ल की गाय भी रहती थीं. प्रयागराज के माघ मेले में भी कपिल मुनि महाराज आकर्षण का केंद्र बने रहते थे.
संजय शर्मा