अक्सर पुलिस विभाग के कर्मचारियों को अपने परिवार के लिए समय नहीं मिल पाता. हालात तब और बदतर हो जाते हैं, जब परिवार में कोई बीमार होता है और पुलिसकर्मी को उसका इलाज कराने के लिए छुट्टी नहीं मिल पाती. ऐसे में वह डिप्रेशन का शिकार होने लगता है. कुछ इसी तरह का मामला उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में सामने आया है.
यहां एक हेड कॉन्स्टेबल ने अपनी पत्नी का इलाज कराने के लिए आईजी रेंज गोरखपुर को पत्र लिखकर अपना ट्रांसफर करने की मांग की, लेकिन उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया. ऐसे में उसने डीजीपी को पत्र लिखकर तीन सवाल पूछे हैं.
हेड कॉन्स्टेबल जनार्दन सिंह ने पत्र में लिखा 'मैं मेघईखास थान जीयनपुर, आजमगढ़ का रहने वाला हूं. मेरी पोस्टिंग कुशीनगर में है. मैंने गोरखपुर ट्रांसफर के लिए पत्र लिखा था क्योंकि मेरी पत्नी का इलाज गोरखपुर एम्स में चल रहा है, लेकिन मेरा पत्र पुलिस महानिरीक्षक, गोरखुपर ने निरस्त कर दिया, जबकि मेरे रिटायरमेंट में केवल 20 महीने रह गए हैं.'
हेड कॉन्स्टेबल ने क्या सवाल पूछे?
1- मेरा प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया गया, कृप्या कारण सहित प्रमाणित आख्या दें.
2- पुलिस महानिरीक्षक जय नारयण सिंह का गृह जनपद आजमगढ़ है, किस शासनादेश के अंतगर्त जनपद गोरखपुर में नियुक्त हैं? इसकी प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराएं.
3-यदि मेरी पत्नी के साथ कोई घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, ये बताने का कष्ट करें.
ये मामला सोशल मीडिया पर हुआ था वायरल
बीते साल जून में यूपी के महोबा में एक पुलिस कॉन्स्टेबल की छुट्टी की अर्जी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी. कॉन्स्टेबल ने 30 दिन की छुट्टी के लिए जो वजह बताई वो हैरान करने वाली थी. सोम सिंह नाम के इस कॉन्स्टेबल ने थाना इंचार्ज को लिखा कि परिवार बढ़ाने के लिए 23 जून से एक महीने की छुट्टी चाहिए.
दिलचस्प ये था कि थाना इंचार्ज ने भी छुट्टी की अर्जी पर ‘फॉर फैमिली डवलपमेंट’ लिखकर विभाग को आगे फॉरवर्ड कर दिया. यहीं नहीं थाना इंचार्ज ने दरियादिली दिखाते हुए 45 दिन की छुट्टी देने की सिफारिश भी की थी.
शिवेंद्र श्रीवास्तव