बांदा: क्वारनटीन में नहीं मिला बेड, पुलिस ने 17 लोगों को पैदल वापस घर लौटाया

मरीजों को बैरंग पैदल लौटाए जाने से पहले सिटी मजिस्ट्रेट सुरेंद्र कुमार ने उनके देर रात उठाए जाने की पुष्टि करते हुए 'आजतक' को बताया कि "मंगलवार देर रात कोरोना मरीज के संपर्क में आए 2 परिवारों के 17 लोगों को पुलिस और स्वास्थ्य टीम ने टेस्टिंग और ट्रेसिंग के तहत जांच के लिए उठाया है. ये सभी चौथे कोरोना मरीज के संपर्क में आए थे, जिसमें एक परिवार के 13 और दूसरे परिवार के 4 लोग समेत कुल 17 लोग शामिल हैं.

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सांकेतिक तस्वीर (PTI) सांकेतिक तस्वीर (PTI)

शिवेंद्र श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 29 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 8:23 PM IST

  • क्वारनटीन में जगह खाली नहीं थी, पुलिस ने लोगों को लौटाया
  • मरीज की कांटेक्ट ट्रेसिंग में पुलिस ने 17 लोगों को उठाया था

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में कोरोना संक्रमण से निपटने के तरीकों को लेकर जिला प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है. मंगलवार सुबह कंफर्म हुए कोरोना पॉजिटिव पेशेंट नंबर 4 के कांटेक्ट ट्रेसिंग में आए परिजनों और रिश्तेदारों के 17 लोगों को पुलिस प्रशासन ने देर रात एंबुलेंस से उठाया लेकिन मेडिकल कॉलेज वार्ड में पर्याप्त जगह न होने के कारण इन्हें वहां से पैदल वापस लौटा दिया. सभी संदिग्ध कोरोना मरीजों ने मेडिकल कॉलेज से शहर तक 6 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की. इन लोगों के रास्ते भर कई लोगों के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है.

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शहर के संभावित 17 कोरोना मरीजों को बैरंग पैदल लौटाए जाने से पहले सिटी मजिस्ट्रेट सुरेंद्र कुमार ने उनके देर रात उठाए जाने की पुष्टि करते हुए 'आजतक' को बताया, "मंगलवार देर रात कोरोना मरीज के संपर्क में आए 2 परिवारों के 17 लोगों को पुलिस और स्वास्थ्य टीम ने टेस्टिंग और ट्रेसिंग के तहत जांच के लिए उठाया है. ये सभी चौथे कोरोना मरीज के संपर्क में आए थे, जिसमें एक परिवार के 13 और दूसरे परिवार के 4 लोग समेत कुल 17 लोग शामिल हैं."

वहीं राजकीय मेडिकल कॉलेज बांदा के प्रिंसिपल डॉ. मुकेश यादव ने 'आजतक' को बताया, "कुछ एंबुलेंस में 17 संभावित कोरोना मरीजों को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज लाया गया है, लेकिन जांच रात में नहीं होती है. यह प्रशासन से पूछिए कि बिना मेडिकल कॉलेज प्रशासन की जानकारी में उन्हें क्यों उठा लाए. सैंपल तो दिन में जाएगा, अब प्रशासन इनको जहां रखना चाहे वहां रात में रखे. हमारे यहां वार्ड में अभी निगेटिव मरीजों को डिस्चार्ज करने के बाद जगह बनाई जाएगी."

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उन्होंने आगे कहा, "हमारे क्वारनटीन वार्ड में 20 मरीजों को रखने की क्षमता है, लेकिन अभी वहां 59 लोग क्वारनटीन में एडमिट हैं जिन्हें डिस्चार्ज करने के बाद ही जगह बनेगी. मैंने गाड़ियों को वापस करा दिया है. इसकी सूचना मैंने डीएम को दे दी है."

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पूरा मामला मंगलवार को जिले के चौथे कोरोना मरीज की पुष्टि होने के बाद का है. नरैनी कस्बे का एक 26 साल का युवक 10 दिनों के पैदल और ट्रक में छिपकर सफर करने के बाद अपने 6 साथियों के साथ मुंबई से मध्य प्रदेश के पन्ना पहुंचकर पहले तो क्वारनटीन हुआ और वहां से किसी तरह निकलकर 25 अप्रैल को बांदा जिले के नरैनी अपने घर आ पहुंचा.

28 अप्रैल को उसमें कोरोना की पुष्टि हुई लेकिन इस बीच वह अपने परिवार में कई लोगों से मिल चुका था. कांटेक्ट ट्रेसिंग के तहत ऐसे ही 17 लोगों को शहर कोतवाली के छिपटेहरी इलाके से पुलिस ने कई एंबुलेंस में उठाया था जिन्हें बाद में असुरक्षित तरीके से पैदल छोड़ दिया गया.

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