यूपी में प्रियंका गांधी की सोशल इंजीनियरिंग, नई टीम में ऐसे साधा समीकरण

उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी का असली लक्ष्य 2022 विधानसभा चुनाव है, जिसके मद्देनजर उन्होंने अपनी नई टीम का एलान कर दिया है. अजय कुमार लल्लू को कांग्रेस उत्तर प्रदेश अध्यक्ष और आराधना मिश्रा को विधायक दल का नेता नियुक्त किया है. कांग्रेस की नई टीम में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण का पूरा ख्याल रखते हुए युवाओं को तरजीह दी गई है.

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अजय कुमार लल्लू और प्रियंका गांधी अजय कुमार लल्लू और प्रियंका गांधी

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 11:28 AM IST

  • कांग्रेस की यूपी टीम का ऐलान, युवाओं को तरजीह
  • ओबीसी समुदाय के अजय कुमार लल्लू प्रदेश चीफ
  • आरधना मिश्रा बनी कांग्रेस विधायक दल की नेता
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश के पार्टी संगठन में नयी जान फूंकने के लिए सोमवार को बड़ा फेरबदल किया है. प्रियंका का असली लक्ष्य 2022 विधानसभा चुनाव है, जिसके मद्देनजर उन्होंने अपनी नई टीम का एलान कर दिया है. अजय कुमार लल्लू को कांग्रेस उत्तर प्रदेश अध्यक्ष और आराधना मिश्रा को विधायक दल का नेता नियुक्त किया है. कांग्रेस की नई टीम में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण का पूरा ख्याल रखते हुए युवाओं को तरजीह दी गई है. तीन दशक से सूबे में सत्ता का वनवास झेल रही कांग्रेस की वापसी कराना प्रियंका और उनकी नई टीम के लिए अग्निपरीक्षा है.

ओबीसी वर्ग की वैश्य जाति से आने वाले अजय कुमार लल्लू यूपी में राज बब्बर की जगह लेंगे. अजय कुमार लल्लू का राजनीतिक सफर बेहद संघर्ष भरा रहा है. यूपी कांग्रेस में युवा नेताओं में से एक लल्लू जन आंदोलनों में शामिल रहे हैं, जिसके चलते प्रियंका की पसंद बने. वहीं, ब्राह्मण समुदाय से आने वाली आरधना मिश्रा के कंधों पर विधानसभा के अंदर योगी सरकार को घेरने की जिम्मेदारी होगी. आरधाना मिश्रा यूपी के कद्दावर नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं.

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लोकसभा चुनाव के बाद प्रियंका गांधी ने पूर्वी यूपी की कमिटियां भंग कर नए सिरे से संगठन बनाने की जिम्मेदारी अजय कुमार लल्लू को दी थी. इसके बाद ही साफ हो गया था कि आगे लल्लू को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. पिछले दिनों में प्रदेश में हुए आंदोलनों के दौरान भी अजय कुमार लल्लू नेतृत्व करते हुए नजर आए थे.

युवाओं के हाथ में कमान

उत्तर प्रदेश की नई कांग्रेस कमेटी में प्रियंका गांधी ने पुराने नेताओं की जगह संघर्षशील जमीनी नेताओं और नौजवानों को नई कांग्रेस में ऊंची जगह दी है. कांग्रेस के नए संगठन में ज्यादातर 40 से 45 साल के नौजवान और लड़ाकू कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता मिली है. इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उपचुनाव में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा नौजवान उम्मीदवारों को उतारा है.

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जातीय समीकरणों का रखा गया ध्यान

कांग्रेस हाशिये पर खड़े समुदाय पर फोकस कर रही है. अजय कुमार लल्लू खुद कान्दू जाति से आते हैं. उत्तर प्रदेश की कमेटी में सामाजिक संतुलन और जातीय समीकरणों का खास ध्यान रखा गया है. कांग्रेस कमेटी में सबसे ज्यादा 45 फीसदी ओबीसी समुदाय को तवज्जो दी गई है. इसमें यादव और कुर्मी समुदाय के साथ-साथ अतिपिछड़े समुदाय से आने वाले निषाद, कुम्हार और धनगढ़ समुदाय जैसे जाति के लोगों गो शामिल किया हया है.

ओबीसी के बाद कांग्रेस का सबसे ज्यादा फोकस दलित समुदाय पर रहा है. उत्तर प्रदेश संगठन में 20 फीसदी दलित समुदाय को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जिसमें पासी, धोबी, जाटव और बाल्मिकी समुदाय को तवज्जो दी गई है. इसके अलावा कांग्रेस संगठन में 19 फीसदी ब्राह्मण समुदाय को जगह मिली है. इसी कड़ी में आरधना मिश्रा को विधायक दल का नेता बनाकर ब्राह्मण समुदाय को साधने की रणनीति बनाई है.

कितना कारगर होगा प्रियंका का दांव?

प्रियंका ने16 फीसदी मुस्लिम को कांग्रेस संगठन में जगह देकर, सपा और बसपा को वोट को अपने साथ लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. ऐसे में अब देखना ये होगा कि क्या अजय कुमार लल्लू अपनी नई टीम के साथ कांग्रेस को यूपी में खोई जमीन किस हद तक वापस दिल पाने में कामयाब होते हैं. कांग्रेस यूपी में पिछले तीन दशक से सत्ता का वनवास झेल रही है.

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