यूपी: नामों पर सहमति नहीं बन पाना ही है मंत्रिमंडल विस्तार टालने की वजह?

बीजेपी के सहयोगी दलों की तरफ से भी मंत्रिमंडल में नामों का दबाव है. अपना दल और निषाद पार्टी भी वादे के मुताबिक, सरकार में अपना प्रतिनिधित्व चाहते हैं. बीजेपी के बड़े केंद्रीय मंत्री के बेटे और पिछली सरकार में केंद्रीय मंत्री के पति भी रेस में बताए जा रहे हैं.

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योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो) योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ,
  • 19 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 12:50 PM IST

लखनऊ में सोमवार को होने वाला योगी आदित्यनाथ सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार फिलहाल टल गया है, लेकिन जल्द ही यह विस्तार होगा, यह भी तय है. सत्ता के विश्वस्त सूत्रों की मानें तो आखिरी वक्त में कई नामों पर सहमति नहीं बन पाई. कुछ नाम ऐसे हैं जिन्हें हटाने का मन बनाया जा चुका था, लेकिन संगठन ने ऐसा करने की अनुमति नहीं दी. योगी आदित्यनाथ नॉन परफॉर्मिंग मंत्रियों को हटाना चाहते हैं जबकि राजनीति और जातीय संतुलन को देखते हुए संगठन ज्यादा कांट-छांट नहीं चाहता.

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बीजेपी के सहयोगी दलों की तरफ से भी मंत्रिमंडल में नामों का दबाव है. अपना दल और निषाद पार्टी भी वादे के मुताबिक, सरकार में अपना प्रतिनिधित्व चाहते हैं. बीजेपी के बड़े केंद्रीय मंत्री के बेटे और पिछली सरकार में केंद्रीय मंत्री के पति भी रेस में बताए जा रहे हैं.

करीब आधा दर्जन मंत्रियों का प्रमोशन होगा जबकि कई बड़े मंत्रियों के महत्वपूर्ण विभाग लिए भी जाएंगे. माना जा रहा है कि इस मंत्रिमंडल में योगी आदित्यनाथ की छाप दिखेगी. पूरी तैयारी थी कि सोमवार सुबह 11 बजे तकरीबन डेढ़ दर्जन मंत्री शपथ लेंगे, जिसमें ज्यादातर नए चेहरे थे. लखनऊ में राजभवन पूरी तरीके से अलर्ट मोड में था और निमंत्रण पत्र भी बांटने की पूरी तैयारी हो चुकी थी, लेकिन आखिरी वक्त में ऐसा क्या हुआ कि सोमवार सुबह 11 बजे होने वाला मंत्रिमंडल विस्तार टल गया.

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आधिकारिक पुष्टि न तो मंत्रिमंडल विस्तार की थी और ना ही इस विस्तार को टालने की, लेकिन सभी विश्वस्त सूत्रों ने सोमवार सुबह 11 बजे मंत्रिमंडल विस्तार के बारे में सूचना दी थी. देर शाम तक सभी मंत्री और मंत्री पद की रेस में आगे विधायक फोन कॉल का इंतजार करते रहे, लेकिन रविवार देर शाम आधिकारिक सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की थी कि मंत्रिमंडल विस्तार का कार्यक्रम कल नहीं है.

बहरहाल, अरुण जेटली की बेहद खराब तबीयत को भी एक वजह बताया जा रहा है, लेकिन यह भी माना जा रहा है कि अभी तक नामों पर पूरी तरीके से सहमति नहीं बन पाई है, लेकिन नामों पर सहमति बन जाएगी ये भी तय है.

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