UP: रिश्तों में मिठास घोल रही 'पुलिस क्लीनिक', नोएडा में 1 साल में घटे तलाक के मामले

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गौतमबुद्ध नगर (Gautam Budh Nagar) में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम (Police Commissionerate System) लागू होने के बाद महिलाओं (Women) की सुरक्षा (Security) के लिए खास इंतजाम किए गए हैं. इसमें खास तरह का क्लीनिक (Clinic) भी शामिल है.

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यह पहल DCP महिला सुरक्षा वृंदा शुक्ला और शारदा यूनिवर्सिटी के तालमेल के साथ शुरू हुई थी. यह पहल DCP महिला सुरक्षा वृंदा शुक्ला और शारदा यूनिवर्सिटी के तालमेल के साथ शुरू हुई थी.

तनसीम हैदर

  • गौतमबुद्ध नगर,
  • 10 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 12:11 PM IST
  • फैमिली डिस्प्यूट रेजॉल्यूशन क्लीनिक का कमाल
  • नोएडा में 1 साल में घटे तलाक के मामले
  • सुलझाए जाते हैं पारिवारिक और घरेलू हिंसा के मसले

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गौतमबुद्ध नगर (Gautam Budh Nagar) में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम (Police Commissionerate System) लागू होने के बाद महिलाओं (Women) की सुरक्षा (Security) के लिए खास इंतजाम किए गए हैं.

इसमें खास तरह का क्लीनिक (Clinic) भी शामिल है. इस क्लीनिक में डॉक्टर पुलिस वाले ही हैं, क्लीनिक के मरीज तलाक मांगने वाले पति-पत्नी हैं, जो एक दूसरे के साथ रहना ही नहीं चाहते हैं. इस फैमिली डिस्प्यूट रेजॉल्यूशन क्लीनिक ( Family Dispute Resolution Clinic) ने एक साल में कमाल कर दिखाया है.

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इस अनोखे क्लीनिक के 1 साल पूरे होने पर नोएडा पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह ने बताया कि यह अनोखी पहल डीसीपी महिला सुरक्षा वृंदा शुक्ला और शारदा यूनिवर्सिटी के तालमेल के साथ शुरू हुई थी. नोएडा पुलिस का ये फैमिली डिस्प्यूट रेजॉल्यूशन क्लीनिक पिछले साल कोविड-19 संक्रमण की पहली लहर के बाद से संचालित किया गया था.

इस सेंटर पर पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा के बढ़ते प्रकरणों के दृष्टिगत घरेलू विवाद, घरेलू हिंसा, लिव इन रिलेशनशिप के विवाद को मध्यस्ता से सुलझाने हेतु रेफर किए जाते है. शारदा यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विशेषज्ञों और नोएडा पुलिस के पैनल कपल को मध्यस्ता की सेवाएं देते हैं. इन विशेषज्ञों में मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक व कानून विशेषज्ञ उपस्थित रहते हैं.

डीसीपी महिला सुरक्षा वृंदा शुक्ला ने बताया कि पुलिस थानों में दी जाने वाली मध्यस्ता की अपेक्षा इस सेंटर में दी जाने वाली मध्यस्ता ने भारी सफलता हासिल की है और पिछले 1 वर्ष में 188 मामले इस सेंटर में रेफर किए गए, जिनमें से 168 मामलो में सफलतापूर्वक मध्यस्ता से कार्यवाही समाप्त की गई है एवं अपनी समस्या लेकर आए दंपति यहां से संतुष्ट होकर वापस चले गए.

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डीसीपी वृंदा शुक्ला ने बताया कि महज 20 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है, इससे सफलता का दर 89.36 प्रतिशत के लगभग निकलता है जो कि महिला थाने में काउंसलिंग की दर लगभग 38 प्रतिशत से बहुत ज्यादा है. इस कार्यक्रम में दौरान पूर्व में सफल रूप से अपने विवाद निपटाने वाले कुछ दंपतियों को भी आमंत्रित किया गया था.

गौतमबुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त आलोक सिंह का कहना है कि परिवार समाज का सबसे बड़ा हिस्सा है और अच्छे समाज के लिए स्वस्थ परिवार की बड़ी जरूरत भी है. छोटी-छोटी गलतफहमियां परिवारों को बिखेर देती हैं. पति-पत्नी के बीच कम्युनिकेशन गैप पैदा हो जाता है. हमारा "फैमिली डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन क्लीनिक" रिश्तों को कायम कर रहा हैं उन्हें टूटने से बचा रहा है.

 

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