यूपी MLC चुनाव: 10 सीटों की जीत से उच्च सदन में बीजेपी की बढ़ेगी ताकत, बहुमत से फिर भी दूर

माना जा रहा है कि सभी 12 विधान परिषद सदस्य निर्विरोध चुने जा सकते हैं. इससे उच्च सदन में बीजेपी की ताकत जरूर बढ़ेगी, लेकिन अभी भी बहुमत के आंकड़े से पार्टी काफी पीछे है और उसे इसके लिए अभी और इंतजार करना होगा. 

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कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली ,
  • 19 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 2:39 PM IST
  • 12 एमएलसी का निर्विरोध चुना जाना तय
  • बीजेपी को उच्च सदन में बहुमत के लिए इंतजार
  • सपा यूपी विधान परिषद में सबसे बड़ी पार्टी है

उत्तर प्रदेश की 12 विधान परिषद सीटों पर हो रहे चुनाव में 13 प्रत्याशी मैदान में उतरे हैं. इसके बावजूद बीजेपी अपने सभी 10 प्रत्याशी जीताने में कामयाब रहेगी जबकि निर्दलीय प्रत्याशी के नामांकन रद होने की स्थिति में सपा के दोनों सदस्य का चुना जाना तय है. माना जा रहा है कि सभी 12 विधान परिषद सदस्य निर्विरोध चुने जा सकते हैं. इससे उच्च सदन में बीजेपी की ताकत जरूर बढ़ेगी, लेकिन अभी भी बहुमत के आंकड़े से पार्टी काफी पीछे है और उसे इसके लिए अभी और इंतजार करना होगा. 

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निर्दलीय के नामांकन होगा खारिज?
यूपी एमएलसी चुनाव के नामांकन के अंतिम दिन सोमवार को बीजेपी के 10 प्रत्याशियों के साथ-साथ 13वें एमएलसी प्रत्याशी के तौर पर महेश चन्द्र शर्मा ने निर्दलीय तौर पर नामांकन दाखिल किया है. महेश चन्द्र शर्मा किसी भी पार्टी के बैकअप कैंडिडेट नहीं हैं और न ही उन्होंने 10 विधायकों के प्रस्तावक की शर्त को पूरा किया है. ऐसे में उनका पर्चा निर्वाचन आयोग खारिज कर सकता है. ऐसे में बीजेपी के 10 और सपा के दो सदस्यों का निर्विरोध चुना जाना तय है. 

निर्विरोध चुना जाना तय 
बीजेपी की ओर से उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, पूर्व आईएएस अरविंद कुमार शर्मा, कुंवर मानवेन्द्र सिंह, गोविन्द नारायण शुक्ला, सलिल विश्नोई,  अश्वनी त्यागी,  धर्मवीर प्रजापति, सुरेन्द्र चौधरी और लक्ष्मण आचार्य मैदान में है, जिनका निर्विरोध चुना जाना तय है. वहीं, सपा की ओर से अहमद हसन और राजेंद्र चौधरी का उच्च सदन पहुंचना तय माना जा रहा है. इस नतीजे से विधान परिषद की संख्या में बीजेपी को इजाफा तो होगा, लेकिन बहुमत के आंकड़े से दूर रहेगी. 

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बीजेपी को सात सीटों का फायदा
बीजेपी 10 विधान परिषद सदस्यों के निर्विरोध चुने जाने के बाद पार्टी सात सदस्यों का लाभ होगा. वहीं, सपा को चार सीटों का नुकसान हो रहा है और बसपा को सभी तीन सीटों का नुकसान हो रहा है. सपा के छह सदस्य का कार्यकाल पूरा हो रहा है, जिसके में दो सदस्य को ही भेजती नजर आ रही है जबकि बीजेपी के तीन सदस्य का कार्यकाल पूरा हुआ है और वो 10 सीटें जीत रही है. वहीं, कांग्रेस के तीन सदस्यों का कार्यकाल पूरा हुआ है और एक भी एमएलसी को चुने जाने की स्थिति में नहीं थी. इसीलिए वो चुनावी मैदान में नहीं उतरी है, जिसके चलते उसे तीन सीटों का नुकसान हुआ है.

उच्च सदन में बीजेपी बहुमत से दूर
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में कुल 100 सदस्य हैं, जिनमें बहुमत के लिए 51 का आंकड़ा चाहिए. विधान परिषद में अभी समाजवादी पार्टी के 55 सदस्य हैं, जिनमें सपा के 6 सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. सपा इनमें से दो सीटों पर वापसी करती दिख रही है, जिसके चलते यूपी उच्च सदन में उसकी संख्या 51 रहेगी. वहीं, बीजेपी सदस्यों की संख्या 25 है, जिनमें से तीन सदस्य के कार्यकाल खत्म हो रहे हैं. लेकिन पार्टी के 10 सदस्य जीतकर आ रहे हैं, जिनके दम पर उसकी संख्या सदन में 32 हो जाएगी. एमएलसी चुनाव में सपा पर बीजेपी भले ही भरी रहे, लेकिन सदन में सपा का दबदबा पहले की तरह ही कायम रहेगा. 

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यूपी में विधान परिषद का प्रारूप 
विधान परिषद में 6 साल के लिए सदस्य चुने जाते हैं. देश के महज 6 राज्यों यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ही विधान परिषद है. यूपी में परिषद की कुल 100 सीटें हैं. सूबे में एमएलसी पांच अलग-अलग तरीके से चुनकर पहुंचते हैं. 100 में से 36 सीट स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि के द्वारा चुनी जाती हैं. इसके अलावा कुल 100 सीटों में से 1/12 यानी 8-8 सीटें शिक्षक और स्नातक क्षेत्र के द्वारा चुनी जाती है. 10 विधान परिषद सदस्य को राज्यपाल मनोनीत करते हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ के लिए होती है. बाकी बची 38 सीटों पर विधानसभा के विधायक के द्वारा चुनी जाती है. इसी कोटे की 12 सीटों पर चुनाव हुए हैं. 

 

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