उत्तर प्रदेश लॉ कमीशन ने नाबालिग, लड़कियों और दलितों-आदिवासियों के जबरन धर्मांतरण कराने पर 7 साल की सजा की सिफारिश की है. लॉ कमीशन की रिपोर्ट को मंजूरी के लिए पहले कैबिनेट में पेश किया जाएगा.
कैबिनेट से पारित होने के बाद इसे विधानसभा से पारित करा कानूनी रूप देना होगा. सूत्रों के मुताबिक, योगी सरकार अगले विधानसभा सत्र में इसे पारित करा कानूनी रूप दे सकती है. गौरतलब है कि यूपी लॉ कमीशन की ओर से सौंपी गई इस रिपोर्ट को यूपी फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट नाम दिया गया है.
प्रस्तावित धर्मांतरण कानून के दायरे में किसी भी तरह का लालच देकर, शादी के लिए गलत नियत से कराया गया धर्म परिवर्तन भी आएगा. लालच के दायरे में पैसा, नौकरी या मुफ्त शिक्षा, यह सभी आएंगे. धर्मांतरण के मामले में खून के रिश्ते से जुड़ा कोई, जैसे माता, पिता, भाई, बहन, पति, पत्नी शिकायत करते हैं तो उनकी शिकायत के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी.
बता दें कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश और यूपी लॉ कमीशन के अध्यक्ष एन मित्तल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी अपनी रिपोर्ट में गुपचुप तरीके से धर्मांतरण पर रोक के लिए एक महीने पहले प्रशासन को नोटिस देने के प्रावधान की सिफारिश की है. धर्मांतरण के लिए प्रशासन को दी गई नोटिस डीएम कार्यालय में सार्वजनिक रूप से चिपकाई जाएगी.
भाजपा के सत्ता में आने से पहले योगी आदित्यनाथ खुद धर्मांतरण के खिलाफ मुखर रहे हैं. योगी आदित्यनाथ का सांस्कृतिक संगठन हिंदू युवा वाहिनी भी धर्मांतरण का विरोध करती रही है. इसके खिलाफ कड़े कानून की मांग करते रहे योगी आदित्यनाथ अब जब स्वयं देश के सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री हैं, उम्मीद जताई जा रही है कि वह इसे जल्द ही कानूनी रूप देने की कोशिश करेंगे.
कुमार अभिषेक