गोंडा: फर्जी दस्तावेजों से 61 शिक्षकों को मिली नौकरी, खुलासा होने पर बर्खास्त

गोंडा में बेसिक शिक्षा विभाग ने दस्तावेजों की जांच के बाद कुल 61 अध्यापकों को बर्खास्त कर दिया है. जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की मानें तो आरोपी टीचरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और वेतन के रिकवरी की तैयारी हो चुकी है.

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धांधली पर सक्रिय हुआ गोंडा का बेसिक शिक्षा विभाग धांधली पर सक्रिय हुआ गोंडा का बेसिक शिक्षा विभाग

शिवेंद्र श्रीवास्तव

  • गोंडा,
  • 06 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 7:51 AM IST

  • शिक्षा विभाग ने 61 शिक्षकों को किया बर्खास्त
  • फर्जी दस्तावेज के आधार पर कर रहे थे नौकरी
  • शिक्षकों के खिलाफ दर्ज कराई जाएगी FIR
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों पर बड़ी गाज गिरी है. गोंडा में बेसिक शिक्षा विभाग ने दस्तावेजों की जांच के बाद कुल 61 अध्यापकों को बर्खास्त कर दिया है. जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की मानें तो आरोपी टीचरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और वेतन के रिकवरी की तैयारी हो चुकी है.

बेसिक शिक्षा अधिकारी का कहना है कि अभी जांच जारी है, जिसमें फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाने वाले अन्य शिक्षकों के नाम भी सामने आ सकते हैं.

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दूसरे की डिग्री पर कर रहे थे नौकरी

गोंडा में शिक्षा विभाग में धांधली के पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं. जिले में बेसिक शिक्षा के 3 हजार से अधिक विद्यालयों की व्यवस्था और निगरानी के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मौजूद हैं. जिले के इन 3 हजार से ज्यादा विद्यालयों में 8 हजार से अधिक शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं.

हैरान करने वाली बात यह है कि यहां इतनी बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी कर रहे शिक्षकों के मामले सामने आए. इन शिक्षकों में से 5 शिक्षक ऐसे हैं जो 1998 से ही किसी दूसरे की डिग्री पर नौकरी कर रहे थे, जिन्हें बर्खास्त कर दिया गया है. शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और मिले वेतन की भी रिकवरी की जाएगी.

पेन कार्ड के जरिए खुलासा

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इन शिक्षकों का खुलासा पेनकार्ड के जरिए हुआ है. विभाग सभी टीचरों के कागजातों की जांच में जुटा था. अब तक इन शिक्षकों के अलावा गोंडा में कुल 61 अध्यापकों के दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं, जिनके आधार पर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है.

इन बर्खास्त अध्यापकों में से कुछ फर्जी तरीके से टीईटी पास दस्तावेज बनवाने में भी कामयाब रहे थे. कुछ शिक्षकों का निवास प्रमाण पत्र फर्जी था तो कुछ के अन्य शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी थे. शिक्षा विभाग का दावा है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाने वाले अध्यापकों के मामले और भी बढ़ सकते हैं.

(इनपुट: शिवेंद्र श्रीवास्तव के साथ अंचल श्रीवास्तव)

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