गरीब आदमी का बीमार होना भी कितना कष्टदायक है, ये कोई यूपी के फतेहपुर जिले की एक मां से पूछिए. उस मां से जिसके 16 साल के बेटे ने इलाज के लिए सरकारी मदद का इंतजार करते करते दम तोड़ दिया.
मां ने बेटे के फेफड़े के इलाज के लिए सरकार की आरोग्य निधि से मदद की अर्जी लगाई थी. लेकिन इस फाइल पर स्वास्थ्य विभाग के रिश्वतखोर बाबू ऐसी कुंडली मारकर बैठे कि उसे मंजूरी के लिए आगे बढ़ने ही नहीं दिया. नतीजा ये रहा कि एक मां ने अपने लाडले को एक अक्टूबर को हमेशा हमेशा के लिए खो दिया.
बेटे की मौत के बाद मां ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के दफ्तर में फैले भ्रष्टाचार का काला चिट्ठा सदर से बीजेपी विधायक विक्रम सिंह को सुनाया. इसके बाद विधायक ने खुद महिला के साथ सीएमओ दफ्तर पहुंचकर अधिकारियों-कर्मचारियों को जमकर हड़काया. हंगामे को देखकर बाबू इस प्रकरण की फाइल लेकर ही चंपत हो गया. सीएमओ की अनुपस्थिति में डिप्टी सीएमओ डॉ. डीएस जौहरी ने इस मामले में जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया. साथ ही सीएमओ के आने पर उन्हें पूरी जानकारी देने की बात भी कही.
ये हालात उस यूपी के हैं जहां मुख्यमंत्री ने गरीबों के इलाज के लिए आरोग्य निधि से राहत के लिए त्वरित कदम उठाने के निर्देश दे रखे हैं. लेकिन स्वास्थ्य विभाग में फैला भ्रष्टाचार गरीबों के इलाज के लिए सरकारी मदद की राह में रोड़ा बना बैठा है.
फतेहपुर के हसवा ब्लॉक क्षेत्र के शाहीपुर गांव की रहने वाली रन्नो देवी के बेटे सिद्धार्थ को फेफड़े की बीमारी थी. पैसे की किल्लत के चलते सिद्धार्थ का सही तरीके से इलाज नहीं हो पा रहा था. रन्नो देवी ने बेटे को इलाज के लिए मुरारी जी चेस्ट हॉस्पिटल में भर्ती कराया. इलाज के लिए सरकारी मदद पाने के वास्ते रन्नो देवी ने 7 जुलाई 2017 को सारे जरूरी दस्तावेज पूरे करने के बाद आवेदन किया. सीएमओ दफ्तर का बाबू कोरे आश्वसान ही देता रहा लेकिन फाइल को दबाए बैठा रहा. रन्नो देवी का आरोप है कि अगर वो दस हजार रुपए घूस बाबू के हाथों में पहुंचा देती तो वो फाइल भी सरकारी मदद की संस्तुति के लिए आगे बढ़ा देता.
महिला जब विधायक के साथ सीएमओ दफ्तर में पहुंची तो वहां कर्मचारियों में हड़कंप मच गया. विधायक ने जब फाइल लाने के लिए कहा तो संबंधित कर्मचारी अलमारी में ताला डाल कर फाइल लेकर भाग गया. साथ ही उसने अपना मोबाइल भी स्विच ऑफ कर दिया.
रन्नो देवी का यही कहना है कि उन्होंने अपना बेटा तो खो दिया लेकिन वो नहीं चाहतीं कि किसी और मां को ये सब देखना पड़े. ऐसा तभी हो सकता है जब स्वास्थ्य विभाग के घूसखोर बाबुओं को सख्त से सख्त सजा मिले.
खुशदीप सहगल