शिक्षक दिवस पर उस परिवार की कहानी, जिन्होंने पंचायत चुनाव में ड्यूटी करते हुए गंवा दी थी जान

वाराणसी में अलग-अलग विभागों से 36 सरकारी कर्मियों ने जान गंवा दी. जिसमें सबसे ज्यादा संख्या, शिक्षकों की थी. वाराणसी में चुनावी ड्यूटी के दौरान शिक्षकों को मिलाकर, शिक्षा विभाग के कुल दो दर्जन कर्मचारियों की मौत हो गई. जिसमें 19 बेसिक शिक्षा विभाग और 5 जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से जुड़े थे.

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चुनावी ड्यूटी में शिक्षकों ने गंवाई जान (फोटो- आजतक) चुनावी ड्यूटी में शिक्षकों ने गंवाई जान (फोटो- आजतक)

रोशन जायसवाल

  • वाराणसी,
  • 05 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 8:26 AM IST
  • चुनावी ड्यूटी के दौरान गंवाई जान
  • अब तक परिवार वाले कर रहे मुआवजे का इंतजार

उत्तर प्रदेश का त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव, एक तरफ जीते हुए प्रत्याशियों के लिए खुशी की खबर लेकर आया तो दूसरी तरफ उन परिवारों के लिए गम का पहाड़, जिनके परिवार के सदस्य चुनावी ड्यूटी के दौरान कोरोना की वजह से काल के गाल में समा गए. वाराणसी में ऐसे ही अलग-अलग विभागों से 36 सरकारी कर्मियों ने जान गंवा दी. जिसमें सबसे ज्यादा संख्या, शिक्षकों की थी. वाराणसी में चुनावी ड्यूटी के दौरान शिक्षकों को मिलाकर, शिक्षा विभाग के कुल दो दर्जन कर्मचारियों की मौत हो गई. जिसमें 19 बेसिक शिक्षा विभाग और 5 जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से जुड़े थे. 

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उन्हीं में से एक 45 वर्षीय शिक्षक आनंद भाई पटेल भी थे. वे वाराणसी के चोलापुर के एक पूर्व माध्यमिक विद्यालय में तैनात थे और 18 जुलाई को मौत के पहले, चुनावी ड्यूटी में लगातार जा रहे थे. लेकिन चुनाव के एक दिन पहले ही उनकी मौत हो गई. अब उनकी जगह, उनकी पत्नी सुनीता पटेल को योगी सरकार ने नौकरी तो दे दी, लेकिन तीसरी श्रेणी की जगह चौथी श्रेणी में परिचारिका की. 

सुनीता रमसीपुर गांव से लगभग 5 किलोमीटर दूर नरउर जूनियर हाई स्कूल में परिचारिका की नौकरी करने रोज जाती हैं. सुनीता ने बताया कि वह इंटर पास है. किए गए वादे के मुताबिक उनको तीसरी श्रेणी में ही नौकरी मिलनी चाहिए थी. लेकिन इंटर तक पढ़े होने के बावजूद उनको चतुर्थ श्रेणी में नौकरी मिली है. और तो और, अभी तक ना तो अनुग्रह राशि का तीस लाख रूपया  मिला है और न ही तनख्वाह मिलनी शुरू हुई है. दो बेटी है, जिसमें से एक इंटर तो दूसरी ग्यारहवीं में है. वहीं एक बेटा नौवीं में है. तीनों सुनीता पर ही आश्रित हैं. शिक्षक दिवस के मौके पर उन्होंने बताया कि वे अपने पति की मौत से तो दुखी हैं, साथ ही सरकार के द्वारा किए गए वादे के पूरा नहीं होने से और भी दुखी हैं. 

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तो वहीं बतौर सहायक अध्यापक सुनील चक्रवाल जो वाराणसी के सेवापुरी ब्लॉक के बिहड़ा गांव में प्राथमिक स्कूल में तैनात थें. उनकी भी मौत पंचायत चुनाव के दौरान हो गई. उनकी जगह उनकी बीए पास पत्नी रंजना चक्रवाल को भी चतुर्थ श्रेणी में केराकतपुर में प्राथमिक स्कूल में परिचारिका के पद पर नौकरी मिली है. लेकिन अभी तक उन्हें भी तनख्वाह नहीं मिली है. उनका कहना है कि अभी प्रक्रिया चल रही है. उनके दो बेटे हैं- एक 15 वर्ष और दूसरा 7 वर्ष का.

शिक्षक दिवस पर उन्होंने बताया कि उन्हें सिस्टम से कोई शिकायत नहीं है. सिस्टम बहुत अच्छा है. जहां तक शिक्षकों की बात है तो शिक्षकों को बच्चों को फूल की तरह तैयार करना चाहिए. जिस तरह से एक बगीचा अलग-अलग प्रकार के फूलों से बनता है उसी तरह स्कूल भी होता है. 

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