हत्या के आरोपी बने आरजे, कैदियों की सुनेंगे फरमाइश, बजाएंगे गाने

बताया जा रहा है कि जेल में अलग से एक रूम बनाया गया है. बंदियों के बैरकों में स्पीकर भी लगाए गए हैं. वे रेडियो पर अपनी फरमाइश के गीत और कविता सुनने के साथ ही खुद भी गा सकेंगे. यह रेडियो महिला पुरुष बंदियों के लिए आवाज बनेगा.

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'तिनका तिनका' अभियान  के तहत जेल सुधार के मिशन में जुटीं वर्तिका नन्दा 'तिनका तिनका' अभियान के तहत जेल सुधार के मिशन में जुटीं वर्तिका नन्दा

राम किंकर सिंह

  • आगरा,
  • 03 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 11:58 AM IST

लगे रहो मुन्ना भाई फिल्म में जब विद्या बालन गुड मॉर्निग मुंबई कहती हैं तो ये आवाज आज भी लोगों के जहन में है. पर अगर खनक भरी आवाज किसी जानलेवा हमले के आरोपी की हो और सुनने वाले जरायम की दुनिया के लोग हों तो आप चौंक जाएंगे. ऐसी ही अनोखी पहल करने जा रहा है आगरा का जिला कारागार. जिला जेल आगरा में कैदियों के लिए अपना रेडियो शुरू किया गया है, जिसके बाद जिला जेल आगरा देश का पहला ऐसा जेल हो गया है जिसका खुद का रेडियो भी है.

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रेडियो रूम के संचालन की जिम्मेदारी सौंप दी गई है. देश की सबसे पुरानी जेल आगरा ने नायाब प्रयोग करते हुए महिला बंदी तुहिना और उदय को आरजे बना दिया है, जो कि जानलेवा हमले और हत्या के आरोप में आगरा की जिला जेल में कैद हैं. जानकारी के मुताबिक महिला बंदी तुहिना बैंगलुरू से एमबीए भी हैं.

बताया जा रहा है कि जेल में अलग से एक रूम बनाया गया है. बंदियों के बैरकों में स्पीकर भी लगाए गए हैं. वे रेडियो पर अपनी फरमाइश के गीत और कविता सुनने के साथ ही खुद भी गा सकेंगे. यह रेडियो महिला पुरुष बंदियों के लिए आवाज बनेगा.

रेडियो रूम का नाम 'जिला कारागार आगरा रेडियो' रखा गया है. 'तिनका तिनका' अभियान के तहत भारत की जेल सुधारक वर्तिका नंदा कैदियों बंदियों को इसकी ट्रेनिंग देंगी. हर रोज शाम को 3 से 4 बजे के बीच रेडियो का प्रसारण कैदियों के बीच किया जाएगा.

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'तिनका तिनका' अभियान  के तहत जेल सुधार के मिशन में जुटी वर्तिका नन्दा ने कहा कि आगरा जेल में बंदियों से कई दौर की बातचीत के बाद इसका पूरा खाका तैयार किया गया है. वर्तिका ने बताया कि वो कैदियों को रेडियो के कार्यक्रम की रूपरेखा निर्माण और कैसे कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे, इसकी ट्रेनिंग देंगी.

वर्तिका का ये कहना है कि रेडियो प्रोग्राम का मुख्य मकसद कैदियों के बीच शिक्षा को बढ़ाना और उनके बीच आत्मविश्वास को जगाना है. जेल अधीक्षक शशिकांत मिश्र ने कहा कि इस प्रयोग को सफल बनाना ही उनका मुख्य उद्देश्य है. जेल के मुताबिक यहां करीब करीब 3000 बंदी हैं. बुधवार 31 अगस्त को बंदियो के साथ रहने वाले बच्चों के गीत प्रस्तुति के साथ इसका आगाज भी हो गया है.

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