लखनऊ के पिकप भवन अग्निकांड मामले की जांच में दोषी पाए गए सीनियर मैनेजर (टेक्निकल) एनके सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है. एनके सिंह को विभूति खंड पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. एनके सिंह पर साजिश के तहत आग लगाने और जरूरी फाइलों को नष्ट करने का आरोप लगाया गया है.
पुलिस को सीसीटीवी फुटेज, सीडीआर और बायोमेट्रिक पंचिंग की जांच करने पर एनके सिंह संदिग्ध के तौर पर देखे गए. आग प्रारंभिक रूप से एनके सिंह के कमरे में ही लगी. गिरफ्तार अधिकारी के पास ही लोन संबंधित अहम फाइलें थीं. आरोप है कि अधिकारी ने अहम फाइलों को जलाकर मिटा डाला.
साजिश का शक
इस मामले में कई अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ जारी है. इस मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एडीजी इंटेलिजेंस को आदेश दिया था. सीएम योगी के आदेश के बाद एडीजी ने कई गंभीर धाराओं में जांच कर एफआईआर दर्ज की थी.
इस मामले में आईपीसी की धारा 353 ,436, 427 और प्रिवेंशन ऑफ डैमेजेस टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट 1984 की धारा 4 में एफआईआर दर्ज की गई थी. सीएम के आदेश के बाद बनी जांच कमेटी के अध्यक्ष एडीजी इंटेलिजेंस एसबी शिरोडकर ने अपनी रिपोर्ट में साजिश की आशंका जताई थी.
रिपोर्ट में कहा गया था कि साजिश के तहत सीनियर मैनेजर एनके सिंह के ऑफिस में फाइलें इकट्ठा कर आग लगाई गई है.
राख हुईं महत्वपूर्ण फाइलें
3 जुलाई को शाम 7 बजे पिकप भवन स्थित प्रदेशीय इंडस्ट्रियल एवं इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन यूपी लिमिटेड के दफ्तर में आग लग गई थी. जिसमें लोन से संबंधित सैकड़ों फाइलें राख हो गईं थी. गौरतलब है कि यहां से उद्यमियों को लोन दिये जाते हैं. ये आंशका जताई जा रही है कि पिकप भवन में आग लगी नहीं थी बल्कि साजिशन लगाई गई थी.
आग में लोन से संबंधित फाइलें जली थीं जिनका ऑडिट नहीं हुआ था. इन सभी फाइलों का डिजिटलाइजेशन भी नहीं हुआ था. जांच के बाद शनिवार को समिति ने शासन को अपनी रिपोर्ट सौंप दी.
कुमार अभिषेक