आगरा के बाद कानपुर से भी प्रियंका को नोटिस, अखिलेश-मायावती पर चुप्पी

आगरा में कोरोना संक्रमण के मृत्यु दर मामले के बाद अब कानपुर शेल्टर होम मुद्दों को उठाने के मामले में योगी सरकार ने प्रियंका गांधी को नोटिस भेजा है. वहीं, कानपुर शेल्टर होम मामले को सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती ने भी उठाया था, लेकिन इन दोनों नेताओं से कोई जवाब नहीं मांगा गया है.

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बसपा प्रमुख मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (फाइल फोटो) बसपा प्रमुख मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 26 जून 2020,
  • अपडेटेड 3:24 PM IST

  • कानपुर शेल्टर होम मामले पर सियासत तेज
  • कानपुर के मुद्दे पर प्रियंका को नोटिस भेजा

उत्तर प्रदेश में कोरोना संकट के दौर में योगी सरकार और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बीच राजनीतिक जंग तेज हो गई है. आगरा में कोरोना संक्रमण के मृत्यु दर मामले के बाद अब कानपुर शेल्टर होम मुद्दों को उठाने के मामले में योगी सरकार ने प्रियंका गांधी को नोटिस भेजा है. वहीं, कानपुर शेल्टर होम मामले को सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती ने भी उठाया था, लेकिन इन दोनों नेताओं से कोई जवाब नहीं मांगा गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर योगी सरकार अखिलेश-मायावती पर क्यों नरम और प्रियंका पर क्यों गरम है?

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दरअसल, कानपुर के एक शेल्टर होम में बीते दिनों उस वक्त हड़कंप मच गया था, जब वहां 57 लड़कियां कोरोना वायरस पॉजिटिव पाई गई थीं. इसके अलावा इनमें से करीब 6 लड़कियां गर्भवती भी थीं. एक एचआईवी तो दूसरी के हेपेटाइटिस से भी संक्रमित होने की खबर आई थी. इसी के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा अध्यक्ष मायावती ने कानपुर मामले को उठाते हुए योगी सरकार को घेरा था.

ये भी पढ़ें: नोटिस पर प्रियंका का जवाब- जो करना हो करें, मैं इंदिरा की पोती, BJP की अघोषित प्रवक्ता नहीं

प्रियंका गांधी ने इस मामले को लेकर ट्वीट कर कहा था, 'कानपुर के सरकारी बाल संरक्षण गृह में 57 बच्चियों को कोरोना की जांच होने के बाद एक तथ्य आया कि 2 बच्चियां गर्भवती निकलीं और एक को एड्स था. मुजफ्फरपुर (बिहार) के बालिका गृह का पूरा किस्सा देश के सामने है. यूपी में भी देवरिया से ऐसा मामला सामने आ चुका है. ऐसे में पुनः इस तरह की घटना सामने आना दिखाता है कि जांचों के नाम पर सब कुछ दबा दिया जाता है, लेकिन सरकारी बाल संरक्षण गृहों में बहुत ही अमानवीय घटनाएं घट रही हैं.

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कानपुर शेल्टर होम मामले को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा था, 'कानपुर के सरकारी बाल संरक्षण गृह से आई खबर से उप्र में आक्रोश फैल गया है. कुछ नाबालिग लड़कियों के गर्भवती होने का गंभीर खुलासा हुआ है. इनमें 57 कोरोना से संक्रमित और एक एड्स से भी ग्रसित पाई गई है. इन सभी का तत्काल बेहतर इलाज कराया जाए. सरकार शारीरिक शोषण करने वालों के खिलाफ तुरंत जांच बैठाए.'

वहीं, बसपा प्रमुख मायावती ने कानपुर के सरकारी शेल्टर होम मामले को लेकर एक के बाद एक ट्वीट कर योगी सरकार पर हमला बोला था. मायावती ने ट्वीट कर कहा था, 'कानपुर राजकीय संरक्षण गृह में काफी बहन-बेटियों के कोरोना संक्रमित होने और कुछ के गर्भवती होने की खबर से सनसनी और चिंता की लहर दौड़ना स्वाभाविक ही है. यह फिर साबित करता है कि यूपी में महिला सम्मान तो दूर उनकी सुरक्षा के मामले में सरकार उदासीन, लापरवाह और गैर-जिम्मेदार बनी हुई है.

मायावती ने दूसरे ट्वीट में कहा था, 'अतः बीएसपी की मांग है कि यूपी सरकार कानपुर बालिका संरक्षण गृह की घटना की लीपापोती न करे, बल्कि इसको गंभीरता से ले और इसकी उच्च-स्तरीय निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे. साथ ही, सरकार यूपी के सभी बालिका गृह की व्यवस्था में अविलम्ब जरूरी मानवीय सुधार लाए तो बेहतर है.' कानपुर शेल्टर होम मामले को लेकर कांग्रेस, सपा, और बसपा तीनों प्रमुख विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने योगी सरकार पर हमला बोला था.

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उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के फेसबुक पोस्ट को भ्रामक और तथ्यहीन बताया था और बालिकाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला करार दिया था. इतना ही नहीं बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष विशेष गुप्ता ने प्रियंका गांधी को नोटिस भेज कर तीन दिन के अंदर जवाब मांगा है. नोटिस में कहा गया कि अगर प्रियंका गांधी अपनी पोस्ट का खंडन नहीं करती हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. ऐसे में सवाल उठता है कि बाल अधिकार संरक्षण ने बाकी दोनों नेताओं पर चुप्पी क्यों अख्तियार कर रखी है.

हालांकि, प्रियंका गांधी ने नोटिस के जवाब पर पलटवार करते हुए कहा है कि जनता के एक सेवक के रूप में मेरा कर्तव्य यूपी की जनता के प्रति है और कर्तव्य सच्चाई को उनके सामने रखने का है. किसी सरकारी प्रोपेगेंडा को आगे रखना नहीं है.' उन्होंने आगे कहा कि यूपी की सरकार उन्हें 'फिजूल की धमकियां देकर' अपना समय व्यर्थ कर रही है. प्रियंका ने कहा, '(योगी आदित्यनाथ) जो भी कार्रवाई करना चाहते हैं, बेशक करें. मैं सच्चाई सामने रखती रहूंगी. मैं इंदिरा गांधी की पोती हूं. कुछ विपक्ष के नेताओं की तरह बीजेपी की अघोषित प्रवक्ता नहीं.'

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