फर्रुखाबाद लोकसभा सीटः कौन-कौन है उम्मीदवार, किसके बीच होगी कड़ी टक्कर

फर्रुखाबाद संसदीय सीट पर बार 9 उम्मीदवार मैदान में हैं. पूर्व विदेश मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद चुनावी मैदान में हैं और उन्हें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के मुकेश राजपूत और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के मनोज अग्रवाल से कड़ी चुनौती मिल सकती है. प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) ने उदय पाल सिंह को मैदान में उतारा है. 3 उम्मीदवार अन्य पार्टियों और 2 निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं. मुकेश राजपूत पिछली बार चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे.

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कांग्रेस को फर्रुखाबाद सीट पर है जीत की आस (सांकेतिक तस्वीर-ट्विटर) कांग्रेस को फर्रुखाबाद सीट पर है जीत की आस (सांकेतिक तस्वीर-ट्विटर)

सुरेंद्र कुमार वर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 25 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 8:39 AM IST

पोटैटो सिटी (आलू का शहर) के नाम से मशहूर फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश के 80 संसदीय सीटों में से एक है और यह राज्य के कानपुर मंडल का हिस्सा है. 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से बीजेपी ने कब्जा जमाया था, जबकि इससे पहले कांग्रेस की मनमोहन सरकार में विदेश मंत्री रहे सलमान खुर्शीद इसी सीट से चुनकर लोकसभा पहुंचे थे. महान समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया भी इस सीट पर चुनावी जीत हासिल कर चुके हैं.

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फर्रुखाबाद संसदीय सीट पर बार 9 उम्मीदवार मैदान में हैं. पूर्व विदेश मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद चुनावी मैदान में हैं और उन्हें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के मुकेश राजपूत और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के मनोज अग्रवाल से कड़ी चुनौती मिल सकती है. प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) ने उदय पाल सिंह को मैदान में उतारा है. 3 उम्मीदवार अन्य पार्टियों और 2 निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं. मुकेश राजपूत पिछली बार चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे.

15 में से 7 जीत कांग्रेस के नाम

फर्रुखाबाद लोकसभा सीट पर अब तक 15 बार लोकसभा सभा चुनाव हो चुके हैं. कांग्रेस ने यहां से 7 बार जीत हासिल की है. इसके अलावा बीजेपी ने 3, सपा ने 2 और जनता पार्टी ने 2 बार जबकि जनता दल और संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी को एक-एक बार जीत मिली है. 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में फर्रुखाबाद कानपुर संसदीय सीट के तहत आता था.

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फर्रुखाबाद लोकसभा सीट पर पहली बार 1957 में चुनाव हुआ और कांग्रेस के मूलचंद दूबे यहां से जीतकर संसद पहुंचे. 1962 में भी मूलचंद चुनाव जीतने में कामयाब रहे, लेकिन 1962 में ही हुए उपचुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के राममनोहर लोहिया ने जीत हासिल की. हालांकि 1967 में कांग्रेस ने एक बार फिर वापसी की और अगले चुनाव (1971) में भी दबदबा कायम रहा, लेकिन 1977 में भारतीय लोकदल के दयाराम शाक्य ने कांग्रेस के अवधेश चन्द्र सिंह को हराकर इस सीट पर कब्जा जमाया. इसके बाद कांग्रेस ने 1984 में वापसी की और खुर्शीद आलम खान सांसद बने, लेकिन पांच साल के बाद 1989 में हुए चुनाव में संतोष भारतीय, जनता दल के टिकट पर जीतने में कामयाब रहे.

1991 में सलमान खुर्शीद जीते

साल 1991 में कांग्रेस ने यहां वापसी की और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने जीत दर्जकर संसद पहुंच गए. साल 1996 और 1998 में बीजेपी से स्वामी सच्चिदानंद हरी साक्षी महाराज सांसद चुने गए, लेकिन 1999 और 2004 में समाजवादी पार्टी से चंद्रभूषण सिंह उर्फ मुन्नू भईया जीत हासिल की. 2009 के चुनाव में कांग्रेस से सलमान खुर्शीद एक बार फिर जीतने में कामयाब रहे. लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी से मुकेश राजपूत 20 साल बाद फर्रुखाबाद सीट पर कमल खिलाने में कामयाब रहे.

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2011 के जनगणना के मुताबिक फर्रुखाबाद की कुल जनसंख्या 23,70,591 है जिसमें 80.25 फीसदी ग्रामीण और 19.75 फीसदी शहरी आबादी है. इस सीट पर अनुसूचित जाति की आबादी 16.11 फीसदी है. इसके अलावा फर्रुखाबाद संसदीय सीट पर राजपूत और ओबीसी समुदाय में लोध और यादव मतदाताओं के साथ-साथ ब्राह्मण मतदाता काफी निर्णायक भूमिका में हैं. 14 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं.

फर्रुखाबाद संसदीय सीट के तहत पांच विधानसभा सीटें अलीगंज, कैमगंज, अमृतसर  भोजपुर और फर्रुखाबाद विधानसभा क्षेत्र आते हैं. मौजूदा समय में पांचों विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा है.

2014 के लोकसभा चुनाव में फर्रुखाबाद संसदीय सीट पर 60.15 फीसदी मतदान हुए थे. इस सीट पर बीजेपी के मुकेश राजपूत ने सपा के रमेश्वर यादव को एक लाख 50 हजार 502  वोटों से मात देकर जीत हासिल की थी. मुकेश राजपूत को तब 4,06,19 और सपा के रमेश्वर यादव को 2,55,693 वोट मिले थे. बसपा के जयवीर सिंह ने 1,14,521 वोट हासिल किए.

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