योगी सरकार ने दिया एक्सप्रेस वे पर मौत का आंकड़ा, एक साल में गई इतने लोगों की जान

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लखनऊ-आगरा और यमुना एक्सप्रेस वे पर हुई दुर्घटनाओं का ब्योरा दिया है. सरकार के मुताबिक, पिछले साल लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे पर 123 दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 130 मौतें हुईं.

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यमुना एक्सप्रेस वे (फाइल फोटो) यमुना एक्सप्रेस वे (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 12:10 PM IST

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लखनऊ-आगरा और यमुना एक्सप्रेस वे पर हुई दुर्घटनाओं का ब्योरा दिया है. सरकार के मुताबिक, पिछले साल लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे पर 123 दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 130 मौतें हुईं. वहीं यमुना एक्सप्रेस वे पर पिछले साल कुल 162 दुर्घटनाएं हुईं. इन हादसों में 145 लोगों की मौत हुई.

इस साल अब तक आगरा एक्सप्रेस वे पर 54 हादसे हुए हैं. इन 54 हादसों में अब तक 68 लोगों ने जान गंवाई है. वहीं यमुना एक्सप्रेस वे पर भी इस वर्ष अब तक 54 हादसे हुए, जिसमें 80 लोगों की मौत हुई है. सरकार ने ये जानकारी विधान परिषद में दी.

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8,191 लोगों की हुई मौत

अगस्त 2012, में शुरू हुआ एक्सप्रेस वे के उद्घाटन से लेकर 31 जनवरी, 2018 तक इस पर लगभग 5,000 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और इन दुर्घटनाओं में 8,191 जिंदगियां समाप्त हो चुकी हैं. यह जानकारी एक आरटीआई आवेदन के जरिए सामने आई है.

गैर सरकारी संगठन सेव लाइफ फाउंडेशन द्वारा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से एक आरटीआई आवेदन के जरिए हासिल जानकारी के अनुसार, राजमार्ग के चालू होने के समय से जनवरी 2018 तक इस पर घटी कुल 5,000 दुर्घटनाओं में 703 भीषण दुर्घटनाएं थीं और इनमें 2,000 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे.

सेव लाइव फाउंडेशन ने बताया, 'यमुना एक्सप्रेस वे पर वर्ष 2012 में 9 अगस्त से लेकर साल के अंत तक कुल 275 दुर्घटनाएं घटी थीं, जिसमें 424 लोगों की जान चली गई थी, और 33 लोग अत्यंत गंभीर रूप से घायल हुए थे, 87 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, 304 लोगों को हल्की चोटें आई थीं.'

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इसी प्रकार 2013 में इस राजमार्ग पर कुल 896 दुर्घटनाएं घटीं, जिनमें 1463 लोग काल के गाल में समा गए थे, 118 लोग अति गंभीर रूप रूप से घायल हुए, 356 लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि 989 लोगों को हल्की चोटें आई थीं. वर्ष 2014 में कुल 771 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1462 लोग मारे गए, जबकि 127 लोग अति गंभीर रूप से घायल हुए, 371 गंभीर रूप से घायल हुए, और 964 लोगों को हल्की चोटें आईं थीं.

वर्ष 2015 में दुर्घटनाओं की संख्या बढ़कर 919 हो गई, जिनमें 1535 लोगों की मौत हुई थी, और 143 लोग अति गंभीर रूप से घायल हो गए थे, 403 गंभीर रूप में घायल हुए थे, जबकि 989 लोगों को हल्की चोटें आईं थीं.

इसी तरह, 2016 में दुर्घटनाओं की संख्या और बढ़ गई. कुल 1219 दुर्घटनाओं में 1657 लोग मारे गए थे, और 133 लोग अति गंभीर रूप से घायल हुए, 421 गंभीर रूप से घायल हो गए, तथा 1103 लोगों को हल्की चोटें आई थीं.

आंकड़े के अनुसार, 2017 में हालांकि दुर्घटनाओं में थोड़ी कमी आई, मगर मृतकों की संख्या बढ़ गई. कुल 763 दुर्घटनाओं में 1572 लोग मारे गए, और 145 लोग अति गंभीर रूप से घायल हुए, 407 लोग गंभीर रूप से घायल हुए, और 1020 लोगों को हल्की चोटें आईं थीं.

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वर्ष 2018 के जनवरी महीने में कुल 37 दुर्घटनाएं घटीं, जिनमें 78 लोग मारे गए, और चार लोग अति गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि 20 लोग गंभीर रूप से घायल हुए, और 54 लोगों को हल्की चोटें आई थीं.

दुर्घटनाओं के इस पूरे आंकड़े को देखा जाए तो इस राजमार्ग के उद्घाटन के बाद से दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या में लगभग हर साल वृद्धि हो रही है. सिर्फ 2014 और 2017 में वृद्धि के क्रम थोड़ा विराम रहा है.

128.39 अरब रुपये की लागत से हुआ था तैयार

गौरतलब है कि छह लेन का यमुना एक्सप्रेस वे ग्रेटर नोएडा को आगरा से जोड़ता है. 165 किमी लंबे इस राजमार्ग के निर्माण पर 128.39 अरब रुपये की लागत आई थी. राजमार्ग का उद्घाटन नौ अगस्त, 2012 को उप्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था.

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