ददुआ का चेला बबुली कोल, चित्रकूट में दहशत का पर्याय बन चुका है

बबुली कोल गैंग के सदस्य से गुरुवार मुठभेड़ के दौरान सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह शहीद हो गए. इससे पहले भी कई बार बाबली कोल की पुलिस से मुठभेड़ हो चुकी है, .

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बीहड़ में पुलिस (फाइल फोटो) बीहड़ में पुलिस (फाइल फोटो)

कुबूल अहमद

  • चित्रकूट,
  • 24 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 4:21 PM IST

चित्रकूट में एक डकैत मरता है तो दूसरा उसका स्थान ले लेता है. कभी ददुआ, तो कभी ठोकिया,तो कभी बलखड़िया और अब बबुली कोल गैंग पुलिस के लिए सिर दर्द बना हुआ है. चित्रकूट में इन दिनों दहशत और आतंक का नाम बन चुका है 'बबुली कोल' और इस डकैत पर 7 लाख का ईनाम है. ॉ

सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह शहीद

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गौरलतब है कि बबुली कोल गैंग के सदस्य से गुरुवार मुठभेड़ के दौरान सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह शहीद हो गए. इससे पहले भी कई बार बाबली कोल की पुलिस से मुठभेड़ हो चुकी है, लेकिन वह हमेंशा पुलिस की पकड़ से दूर ही रहा है.

बलखड़िया के बाद बबली कोल बना सरदार

बुंदलेखंड में दहशत का नाम बबुली कोल है. उसके नाम से बकायदा रंगदारी वसूली जाती है.  डकैत बबुली कभी डकैत ददुआ का चेला हुआ करता था. ददुआ की मौत के बाद वो दस्यु सरगना बलखड़िया उर्फ बाल खड़े उर्फ सुदेश पटेल के गिरोह में शामिल हुआ. एक मुठभेड़ में बलखड़िया के मरने के बाद बबली कोल  गैंग का सरदार बन गया.

सैकड़ो संगीन वारदात

बबुली कोल पर मारपीट, हत्या, रंगदारी, अपहरण जैसे संगीन मामले दर्ज हैं. बीहड़ों में इन दिनों बबुली कोल का राज चलता है और कहा जाता है कि बुंदेलखंड के गांवों में उसकी इजाजत के बिना पत्ता भी नहीं हिलता.

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लेटर पैड के जरिए वसूली

बुंदेलखण्ड की जमीं पर डकैतों का राज कई दशकों से रहा है. एक डकैत मरता है तो दूसरा पैदा हो जाता है. कहते हैं कि पाठा के जंगलों में रहने वाला बबुली अपने लेटर पैड से वसूली करता है. बबुली के गैंग के डकैत बुंदेलखंड के गांव-गांव जाकर बबुली का लेटर पैड व्यापारियों को बांटते हैं.

 

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