अयोध्या में रामलला के दर्शन से पहले जान लें ये नियम

रामलला की पांच नित्य आरती होती हैं. सुबह होने वाली मंगला आरती के साथ श्रृंगार आरती, दोपहर को भोग आरती, शाम को संध्या आरती और आखिर में शयन आरती.

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आरती, दर्शन के लिए ये हैं नियम (फोटो- आजतक) आरती, दर्शन के लिए ये हैं नियम (फोटो- आजतक)

कुमार अभिषेक / बनबीर सिंह

  • अयोध्या,
  • 18 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 8:11 AM IST

  • मनचाहा भोग चढ़ाने के लिए पहले बताना होगा
  • अगले दिन भक्त को मिलेगा समय

कोई भक्त अयोध्या में रामलला की आरती अपने नाम से कराना चाहता है या मनचाहा भोग चढ़ाना चाहता है तो उसे एक दिन पहले अधिकारियों और ट्रस्ट को इसकी सूचना देनी होगी. राम लला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास के मुताबिक इसी के हिसाब से अगले दिन भक्त को समय दिया जाएगा. भक्त को बैरीकेडिंग तक सुरक्षाकर्मी ले जाएंगे और वहां से गेट खोल कर उसे राम लला के दर्शन के लिए जाने दिया जाएगा.

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आरती के लिए कोई शुल्क तय नहीं

अयोध्या में रामलला की आरती अब हर भक्त अपने नाम से करा सकेगा, साथ ही मनचाहा भोग भी चढ़ा सकेगा लेकिन इसके लिए रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्रे ट्रस्ट की ओर से कोई शुल्क निर्धारित नहीं किया गया है. श्रद्धालु जो भी अपनी भावना से दान देगा या भोग प्रसाद चढ़ाएगा तो उसे स्वीकार कर लिया जाएगा. फिर उसी श्रद्धालु के नाम से आरती करा दी जाएगी.

रामलला की पांच नित्य आरती

रामलला की पांच नित्य आरती होती हैं. सुबह होने वाली मंगला आरती के साथ श्रृंगार आरती, दोपहर को भोग आरती, शाम को संध्या आरती और आखिर में शयन आरती. इनमें से किसी में भी भक्त अपने नाम की आरती करा सकते हैं. मंगला आरती बाहर न होकर भीतर ही होती है.

आचार्य सत्येंद्र दास ने आजतक से विशेष बातचीत में कहा कि भक्त अपने नाम से आरती कराने और आरती में सम्मिलित होने के लिए उनसे भी संपर्क कर सकते हैं. हालांकि, मंदिर की बैरिकेडिंग के उस पार जाने और मंदिर के ठीक सामने खड़े होने के लिए अधिकारियों और ट्रस्ट की ओर से पूर्व अनुमति लेना जरूरी है.

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अब मनचाहा भोग चढ़ा सकते हैं भक्त

सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अभी तक श्रद्धालुओं को पॉलिथीन पैक में मिश्री का प्रसाद चढ़ाने की ही आज्ञा थी. लेकिन अब भक्तों को अपनी इच्छानुसार भोग प्रसाद चढ़ाने की अनुमति दे दी गई है. ये सुविधा और आराध्य की आरती अपने नाम से कराने की अनुमति मिलने से भक्त खुश हैं.

आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि “ये परंपरा सभी मंदिरों में है कि भक्त अपने नाम से आरती करा सकते हैं, भोग चढ़ा सकते हैं, वस्त्र भेंट कर सकते हैं या जो कुछ भी संकल्प किया है उसे अर्पित कर सकते हैं. रामलला के मंदिर में पहले सुरक्षा कारणों से आरती और भोग संभव नहीं था. लेकिन अब अस्थाई मंदिर बन जाने के बाद ट्रस्ट की अनुमति से कोई भी शख्स इच्छा अनुसार आरती और भोग चढ़ा सकता है. पहले भी लोग रामलला को वस्त्र वगैरह चढ़ाते रहे हैं इसमें नया कुछ नहीं है.”

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भक्त ने जो भी भेंट-दान दिया, रजिस्टर में दर्ज होगा

मुख्य पुजारी के मुताबिक “कोई भी भक्त आरती, भोग या कुछ भेंट करना चाहता है तो उसे इसे अधिकारियों और ट्रस्ट के संज्ञान में लाना होगा. फिर उसी के हिसाब से समय तय दिया जाता है. मंदिर में रजिस्टर की व्यवस्था है जिसमें जो भी भक्त ने भेंट किया है, वो सब अंकित रहेगा.”

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हालांकि, पहले भी राम जन्मभूमि परिसर में गर्भगृह से अस्थाई मंदिर में विराजमान होने के बाद ही रामलला की आरती में नियमित तौर पर कुछ विशिष्ट अतिथि शामिल होते रहे हैं. इसमें अयोध्या के संत महंतों से लेकर बाहर से आए भक्त तक शामिल रहे हैं. अभी भी अयोध्या के संत महंतों को सांध्य आरती में बुलाया जाता है और उनका सम्मान किया जाता है. लेकिन अब सभी भक्तों को अपने नाम से आरती कराने और भोग चढ़ाने का अवसर मिलेगा.

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राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी भक्तों को आरती, भोग, भेंट चढ़ाने की अनुमति होने की पुष्टि की है. जिन्हें भी विशेष पूजा या भव्य आरती करानी है उन्हें पहले ट्रस्ट की तरफ से अनुमति लेनी होगी.

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