अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर में चल रहे समतलीकरण के दौरान राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को कई पुरातात्विक मूर्तियां, खंभे और शिवलिंग मिले हैं. 4 फीट से बड़ा एक शिवलिंग उस हिस्से से मिला है जहां मलबा हटाने और समतलीकरण का काम चल रहा था. खुदाई के दौरान भारी संख्या में देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियों के अतिरिक्त 7 ब्लैक टच स्टोन के स्तम्भ, 6 रेड सैंडस्टोन के स्तम्भ सहित 4 फीट से बड़ा एक शिवलिंग भी मिला है.
आपको बता दें कि श्री रामजन्मभूमि परिसर में यह पुरातत्विक महत्व के स्तम्भ और खंडित मूर्तियां उस गर्भगृह के नीचे से मिली हैं जहां पहले रामलला विराजमान थे. उस स्थान पर राम मंदिर की नींव तैयार करने के लिए क्रेन और ट्रैक्टरों के जरिये मलबे को हटाने के साथ समतलीकरण का काम चल रहा है. माना जा रहा है कि राम मंदिर की नींव तैयार करने के लिए जो खुदाई होगी, उसमें पुरातत्विक महत्व के और ऐसे साक्ष्य मिलेंगे जो सदियों पुराने राम मंदिर से जुड़े हो सकते हैं.
साधु-संतों में हर्ष की लहर
गर्भ गृह के नीचे मंदिर से जुड़े अवशेष मिलने के बाद अयोध्या के साधु संतों में हर्ष की लहर है. वे कहते हैं कि पुरातत्व विभाग और उन्होंने जो कुछ भी कहा था, वह सच साबित हो रहा है. इसके लिए वह पुरातत्व विभाग को धन्यवाद देना चाहते हैं. पुरातत्व विभाग की खुदाई में भी मंदिर से जुड़े ऐसे ही अवशेष मिले थे. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने बाकायदा एक प्रेस रिलीज जारी कर इस बात की जानकारी दी कि ये तमाम चीजें पिछले 10 दिनों की खुदाई के दौरान मिली हैं.
श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस बारे में कहा कि जीर्णोद्धार, पुनर्निर्माण हो रहा है, राम मंदिर नया नहीं बन रहा है. मंदिर वहां पहले से है केवल उसका पुनर्निर्माण हो रहा है. नया कुछ भी नहीं है. वह केवल कपड़े में था, कपड़े हटाकर उसका पुनर्निर्माण हो रहा है. जो सरदार पटेल की भावना थी, जो शहर, अस्पताल, सड़कों के नाम बदलने वालों की भावना थी, वही भावना अयोध्या के समाज की निरंतर 1528 से चली आ रही है. अयोध्या के राम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण यह हिंदुस्तान के स्वाभिमान की पुनः प्रतिष्ठा का निर्माण है.
स्वर्णिम इतिहास का प्रमाण: कन्हैया दास
अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष कन्हैया दास ने कहा कि यह श्री राम जन्मभूमि का प्रमाण है जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला भी दिया. पुरातत्व के रिपोर्ट के आधार पर कि इससे पहले यहां कोई भव्य मंदिर था जिसको तोड़कर या उसके ऊपर इस ढांचे को खड़ा किया गया था. यह ज्वलंत उदाहरण है कि समतलीकरण करते समय यह सब अवशेष मिल रहे हैं. संभवत रामजी की जो जन्म भूमि है, जो गर्भ गृह है, अगर उसके नीचे खुदाई हो तो और भी ज्वलंत उदाहरण मिलेंगे जो राम जन्मभूमि के प्रमाण को पुष्ट करेंगे. इससे सिद्ध होता है कि प्राचीन काल का जो हमारा स्वर्णिम इतिहास है, उसका यह प्रमाण है और राम जन्मभूमि वही है जहां सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है.
मंदिरों की नक्काशी के सबूत
राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा, बहुत मूल्यवान सामग्री मिली है और यह दर्शाता है कि प्राचीन काल में जो नक्काशी हमारे मंदिरों की होती थी, मंदिर का जो स्वरूप होता था और जो मंदिर में लगते थे, वे सब अवशेष मिल रहे हैं. जिस समय पुरातत्व विभाग ने खुदाई की थी, उस समय रामलला वहां पर विराजमान थे. जहां पर रामलला विराजमान थे, वहां पर खुदाई नहीं हो सकी थी और न ही उसकी जांच हो पाई थी. इसलिए रामलला के हट जाने के बाद अब इसका समतलीकरण किया जा रहा है. जो वस्तु मिल रही है वह अमूल्य हैं और बहुत ही महत्वपूर्ण है. कोई अष्टदल कमल है, कोई भगवान विष्णु के चक्र के समान है, कुछ मूर्तियां खंडित हैं और उन मूर्तियों के अवशेष मिले हैं.
सत्येंद्र दास ने कहा, 'मैं समझता हूं कि उस समय भगवान राम का ही मंदिर नहीं, बल्कि शिव का भी मंदिर वहां बगल में रहा होगा और देवी देवताओं के मंदिर भी होंगे. इसलिए अब प्रमाण रूप में जो अवशेष में मिल रहे हैं, वह बहुत ही अमूल्य हैं.
अब सभी विवाद निपटे
अवशेष के बारे में रामविलास दास वेदांती ने कहा, राम जन्म भूमि के चिन्ह मिले थे, चक्र, शंख, गदा, त्रिशूल मिले थे. उसमें स्वास्तिक के चिन्ह, ॐ के चिन्ह, अमृत कलश मिले. मंदिर की आकृति के बनावट के पत्थर मिले, उन पत्थरों को बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के लोगों ने यह कहकर नकार दिया कि विश्व हिंदू परिषद वालों ने रख दिया है. अब जब खुदाई प्रारंभ हो गई है और खुदाई में जो अवशेष मिल रहे हैं, उनको तो विश्व हिंदू परिषद गाड़ नहीं रही है और न ही विश्व हिंदू परिषद उखाड़ रही है.
वेदांती ने कहा कि आज दुनिया के सारे मुसलमानों से निवेदन करना चाहूंगा कि इसको देख लें और दुनिया के मुसलमानों को बता दें कि यहां इस्लाम का कोई चिन्ह मिला ही नहीं. मस्जिद का कोई चिन्ह नहीं मिला. जो भी चिन्ह मिले हैं वे भगवान श्री राम के हैं. इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि इस पर अब कोई विवाद नहीं रह गया है. सुप्रीम कोर्ट ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है.
हनुमान गढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि खुदाई में तमाम सनातन धर्म से जुड़ी सामग्री मिल रही है. एसआईटी ने भी बताया था कि इसके नीचे कोई भवन, प्राचीन मठ मंदिर है तो अब लोगों की आंख खुलनी चाहिए. लगातार लोग प्रमाण मांगते थे, अब यही प्रत्यक्ष प्रमाण है. हमको लगता है 2000 वर्ष पूर्व महाराज विक्रमादित्य के द्वारा जो मंदिर बनाया गया था और विदेशी आक्रांता ने उसे तोड़ा था, अब उसका प्रत्यक्ष प्रमाण मिला है.
कुमार अभिषेक / बनबीर सिंह