क्या 3 मई तक देश में कोरोना पीक पर होगा? ICMR बोला- जवाब देना कठिन

ICMR के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल के जवाब में कहा कि यह बताना बहुत कठिन है कि 3 मई तक पीक आ जाएगा या फिर कब तक आएगा. हालांकि, अभी भारत अभी स्टेबल पॉजिशन में है. पॉजिटिविटी रेट लगातार 4.5% पर बना हुआ है जिसके दम पर कहा जा सकता है कि हमारा ग्राफ तेजी से ऊपर नहीं जा रहा है.

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देश में कोरोना वायरस के 21 हजार 700 मामले (फाइल फोटो) देश में कोरोना वायरस के 21 हजार 700 मामले (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 8:29 PM IST

  • देश में कोरोना वायरस के 21,700 मामले
  • अब तक कुल 686 लोगों की हो चुकी है मौत

देश में कोरोना वायरस के मामले हर रोज बढ़ रहे हैं. बीते कुछ दिनों से इस महामारी के प्रतिदिन 1000 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या देश में कोरोना रफ्तार पकड़ चुका है. अगर नहीं तो क्या 3 मई को लॉकडाउन की मियाद पूरी होने तक देश में कोरोना संक्रमण पीक पर होगा. इन्हीं सवालों का जवाब भारतीय आर्युविज्ञान अनुसंधान संस्थान (ICMR) ने गुरुवार को दिया है.

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ICMR के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह बताना बहुत कठिन है कि 3 मई तक पीक आ जाएगा या फिर कब तक आएगा. हालांकि, भारत अभी स्टेबल पोजिशन में है. पॉजिटिविटी रेट लगातार 4.5% पर बनी हुई है जिसके दम पर कहा जा सकता है कि हमारा ग्राफ तेजी से ऊपर नहीं जा रहा है.

बता दें कि कोरोना से निपटने के लिए देश में लॉकडाउन लागू है और इसकी मियाद 3 मई को पूरी हो रही है. फिलहाल अभी भारत में कोरोना के 21 हजार 700 मामले हैं और करीब 700 लोगों की जान चुकी है. 24 घंटे में कोरोना के 1409 नए मामले सामने आए हैं.

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AIIMS डायरेक्टर ने क्या कहा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एम्स के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया से जब पूछा गया कि कोरोना पर देश की स्थिति से वह कितने संतुष्ट हैं तो उन्होंने कहा कि कोविड-19 मरीज ठीक हो रहे हैं, यह बेहद खुशी की बात है. लेकिन, दुखद बात यह है कि ठीक होकर जा रहे लोगों के प्रति भी लोगों का रवैया शंका से भरा होता है. इस कारण बीमारी बढ़ रही है और मरीजों की मृत्यु दर भी.

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उन्होंने आगे कहा कि किसी को कोरोना वायरस का संक्रमण हो जाने पर समाज यह नहीं स्वीकारना चाहता है कि इलाज के बाद ठीक होने पर भी वह खतरे से मुक्त हो गया है. इस कारण लोग उसके और उसके परिवार के साथ दुर्व्यवहार करते हैं. इसका नतीजा यह हो रहा है कि जिनमें कोविड-19 के लक्षण दिखते भी हैं तो वे तुरंत सामने आने से बचते हैं. वे अस्पताल अथवा स्वास्थ्य केंद्र पर नहीं जाना चाहते क्योंकि उन्हें लगता है कि पड़ोसियों को पता चल गया तो वे मुझे और मेरे परिवार से दूरी बना लेंगे और परेशान करेंगे.

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