हिन्दी को लेकर बीते दिनों में कई विवादों ने जन्म लिया है. पहले शिक्षा नीति में हिन्दी थोपने का आरोप लगा और इस बीच मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (MDMK) के महासचिव और राज्यसभा सांसद वायको ने भी इस भाषा को जबरन थोपे जाने की बात कह दी है. इसी के खिलाफ राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने चेयरमैन वेंकैया नायडू को चिट्ठी लिखी है, जिसमें वायको के बयान को हिंदुस्तानियों के लिए अपमानजनक बताया गया है.
सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि वायको का कहना है हिन्दी की डेवलेप भाषा नहीं है, ये सिर्फ एक किताब में ही है. उनका बयान सिर्फ भारतीयों का अपमान है. स्वामी ने लिखा कि उन्होंने ये भी मांग की है कि प्रधानमंत्री को लोकसभा में अंग्रेजी में बात करनी चाहिए, जो कि संविधान के तहत भी गलत है.
Senior BJP MP, Dr. Subramanian @Swamy39's letter to RS Chairperson against Vaiko July 16, 2019!!
Cc: @jagdishshetty pic.twitter.com/Jg0Covi3Ci
— Dharma (@Dharma2X) July 16, 2019सुब्रमण्यम स्वामी ने यहां तर्क रखा कि संविधान के आर्टिकल 351 के तहत हिंदी को यूनियन ऑफ इंडिया की भाषा बताया गया है. स्वामी का आरोप है कि वायको ने जिस संविधान की शपथ ली है वह उसी का उल्लंघन कर रहे हैं. ऐसे में स्वामी ने मांग की है कि वायको को राज्यसभा सदस्यता को तुरंत रद्द कर दिया जाए.
दरअसल, वायको का एक बयान सामने आया था. जिसमें उन्होंने कहा था कि हिन्दी में क्या साहित्य है. हिन्दी की कोई जड़ नहीं है और संस्कृत एक मृत भाषा है. हिन्दी में चिल्लाने से कोई नहीं सुन सकता, भले ही (संसद में) कान में इयरफोन लगा हो. संसद में हो रही बहस का स्तर गिरा है. इसका मुख्य कारण हिन्दी को थोपा जाना है.
साथ ही साथ उन्होंने मांग की थी कि प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और गृहमंत्री को भी सदन में अंग्रेजी भाषा में बयान देना चाहिए. बता दें कि तमिलनाडु में हिन्दी भाषा का लगातार विरोध होता रहा है, वायको इस आंदोलन के कर्ताधर्ताओं में से एक रहे हैं.
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