'महंगा' पड़ेगा PM मोदी का सपना, एक साथ चुनाव के लिए EVM खरीद पर खर्च होंगे 4555 करोड़

बीजेपी सरकार के गठन के बाद से ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के कोशिशें तेज हो गई हैं. देश के कुछ राजनीतिक दल इस विचार के साथ हैं तो वहीं कुछ दलों को इस पर आपत्ति भी है. 

Advertisement
पोलिंग अधिकारी (फाइल फोटो- Getty Images) पोलिंग अधिकारी (फाइल फोटो- Getty Images)

अनुग्रह मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 03 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 8:34 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के 'एक देश एक चुनाव' के सपने को पूरा करने के लिए चुनाव आयोग को ज्यादा रुपयों की जरूरत होगी. बीजेपी भले ही इस प्रक्रिया को अपनाकर चुनावी खर्च कम करने की दलील दे रही हो लेकिन विधि आयोग ने चुनाव आयोग के हवाले से अपनी मसौदा रिपोर्ट में बताया है कि नए ईवीएम और पेपर ट्रेल मशीनों को खरीदने के लिए 4500 करोड़ रुपये से भी ज्यादा धन की जरूरत होगी. मोदी सरकार सत्ता में आने के बाद से ही देश में एक साथ लोकसभा और राज्य विधानसभाओं कराने की पक्षधर रही है.

Advertisement

एक साथ चुनाव कराए जाने पर पिछले हफ्ते जारी अपनी रिपोर्ट में विधि आयोग ने बताया कि 2019 आम चुनावों के लिए लगभग 10,60,000 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे. रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयोग ने सूचित किया है कि अगर एक साथ चुनाव कराए जाते हैं तो अब तक लगभग 12.9 लाख मतपत्र इकाइयों, 9.4 लाख नियंत्रण इकाइयों और लगभग 12.3 लाख वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) की कमी है.

इसके अनुसार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) जिसमें एक नियंत्रण इकाई (सीयू), एक मतपत्र इकाई (बीयू) और एक वीवीपैट है, जिसकी लागत लगभग 33,200 रुपये है. मसौदा रिपोर्ट में कहा गया है कि आगामी चुनाव एक साथ कराये जाने से ईवीएम की खरीद पर लगभग 4555 करोड़ रुपये का खर्च आएगा.  

विधि आयोग ने कहा कि EVM मशीन 15 साल तक काम कर सकती है और इसी को ध्यान में रखकर 2024 में दूसरी बार एक साथ चुनाव कराये जाने के लिए 1751.17 करोड़ रुपये और 2029 में तीसरी बार एक साथ चुनाव कराए जाने के लिए ईवीएम मशीनों की खरीद पर 2017.93 करोड़ रुपये की जरूरत होगी. इसमें कहा गया है, इसलिए 2034 में प्रस्तावित एक साथ चुनाव के लिए नए ईवीएम की खरीद के लिए 13,981.58 करोड़ रुपये की जरूरत होगी.

Advertisement

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराये जाते हैं तो हर मतदान केन्द्र के लिए अतिरिक्त ईवीएम और अतिरिक्त चुनाव सामग्री के अलावा कोई अतिरिक्त खर्च शामिल नहीं होगा. मसौदा रिपोर्ट में कहा गया है अतिरिक्त ईवीएम के मद्देनजर बड़ी संख्या में मतदान केन्द्रों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत हो सकती है.

इससे पहले चुनाव आयोग चुनाव आयोग एक साथ चुनाव कराने को लेकर अपनी राय स्पष्ट कर चुका है. चुनाव आयोग का मानना है कि मौजूदा संवैधानिक प्रावधानों में यह संभव नहीं है, लिहाजा सरकार को पहले संवैधानिक प्रावधानों पर ध्यान देना चाहिए. हालांकि विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आधे राज्यों में एक साथ चुनाव कराने लिए संवैधानिक संशोधन जरूरी नहीं है. 12 राज्यों और एक केंद्र शाषित प्रदेश का चुनाव 2019 के आम चुनावों के साथ कराए जा सकते हैं.

बता दें कि देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव की वकालत करते हुए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने विधि आयोग को पत्र भी लिखा था. जिसमें अमित शाह ने कहा था कि इससे चुनाव में बेतहाशा खर्च पर लगाम लगागी और देश के संघीय स्वरूप को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement