सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 21 राज्यों को 11.8 लाख वनवासियों और आदिवासियों को बेदखल करने संबंधी अपने ही 13 फरवरी के आदेश पर रोक लगा दी है. जंगल की जमीन पर इन वनवासियों के दावे अधिकारियों ने अस्वीकार कर दिए थे.
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने इन राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे वनवासियों के दावे अस्वीकार करने के लिए अपनायी गई प्रक्रिया के विवरण के साथ हलफनामे कोर्ट में दाखिल करें. पीठ इस मामले में अब 30 जुलाई को आगे सुनवाई करेगी.
दरअसल सुप्रीम कोर्ट बुधवार को 13 फरवरी के अपने आदेश पर रोक लगाने के केन्द्र सरकार के अनुरोध पर विचार के लिए सहमत हो गई थी. कोर्ट ने इस आदेश के तहत 21 राज्यों से कहा था कि करीब 11.8 लाख उन वनवासियों (आदिवासियों) को बेदखल किया जाए, जिनके दावे अस्वीकार कर दिए गए हैं.
पीठ ने आज सुनवाई के बाद कहा, 'हम अपने 13 फरवरी के आदेश पर रोक लगा रहे हैं. पीठ ने कहा कि वनवासियों को बेदखल करने के लिए उठाए गए तमाम कदमों के विवरण के साथ राज्यों के मुख्य सचिवों को हलफनामे दाखिल करने होंगे.'
केन्द्र ने 13 फरवरी के आदेश में सुधार का अनुरोध करते हुए कोर्ट से कहा कि अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) कानून, 2016 लाभ देने संबंधी कानून है. क्योंकि ये लोग बेहद गरीब और निरक्षर हैं, जिन्हें अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं है, इसलिए इनकी मदद के लिए उदारता अपनाई जानी चाहिए.
अमित कुमार दुबे