टीवी पर देखा भूमि पूजन, अयोध्या नहीं आ सके 92 साल के रामलला के वकील परासरण

विधि क्षेत्र में पांडित्य हासिल कर चुके वरिष्ठ वकील के परासरण को इंडियन बार का पितामह कहा जाता है. राम मंदिर मुहिम को अदालत में मुकम्मल जगह तक ले जाने में उनके योगदान को देखते हुए परासरण को राममंदिर के निर्माण के लिए गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास में संस्थापक सदस्य बनाया गया है.

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रामलला विराजमान के वकील रहे के परासरण (फोटो-ट्विटर) रामलला विराजमान के वकील रहे के परासरण (फोटो-ट्विटर)

aajtak.in

  • चेन्नई,
  • 05 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 4:52 PM IST

  • अयोध्या नहीं आ सके वकील परासरण
  • टीवी पर देखा भूमिपूजन का कार्यक्रम
  • रामलला विराजमान के रहे हैं वकील

सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान का पक्ष रखने वरिष्ठ वकील के परासरण ने अपने पूरे परिवार के साथ राम मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन का कार्यक्रम लाइव देखा. 92 वर्षीय वरिष्ठ वकील के परासरण ने रामलला के केस को अंजाम तक ले जाने में अहम भूमिका निभाई है.

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वरिष्ठ वकील 92 वर्षीय के परासरण ने घर से ही टीवी पर राममंदिर भूमि पूजन का पूरा कार्यक्रम देखा. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष ने अपने ट्वविटर अकाउंट पर उनके घर की तस्वीरें शेयर की.

बता दें कि कोरोना संकट की वजह से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई अग्रणी नेता भूमि पूजन कार्यक्रम में अयोध्या नहीं पहुंच पाए. इनमें लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं.

पढ़ें- अयोध्या: भूमिपूजन के बाद बोले CM योगी, 135 करोड़ भारतवासियों का संकल्प पूरा

बता दें कि 3 अगस्त को ही ये जानकारी आ चुकी थी कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दो सदस्य भी भूमिपूजन कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले सकेंगे.

रिपोर्ट के मुताबिक प्रयागराज के वासुदेवानंद महाराज, चौमासा नक्षत्र की वजह से अपनी गद्दी नहीं छोड़ेंगे. जबकि के परासरण चेन्नई में होने की वजह से इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए.

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विधि क्षेत्र में पांडित्य हासिल कर चुके वरिष्ठ वकील के परासरण को इंडियन बार का पितामह कहा जाता है. राम मंदिर मुहिम को अदालत में मुकम्मल जगह तक ले जाने में उनके योगदान को देखते हुए परासरण को राममंदिर के निर्माण के लिए गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास में संस्थापक सदस्य बनाया गया है. दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में स्थित उनके घर के पते पर ही इस ट्रस्ट को रजिस्टर्ड भी किया गया है.

पढ़ें- के परासरण: वकालत का वो 'पितामह', जिन्होंने SC में रखीं रामलला विराजमान की दलीलें

के परासरण दो बार देश के अटॉर्नी जनरल रह चुके हैं. अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वे अपनी अंतिम सांस लेने से पहले इस केस में पूरा न्याय चाहते हैं. मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे संजय किशन कॉल ने के परासरण को इंडियन बार का पितामह कहा था.

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