रेल मंत्रालय ने नई कैटरिंग पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी कर दिया है. जारी किए गए ड्राफ्ट के मुताबिक रेलवे नई कैटरिंग पॉलिसी में आईआरसीटीसी को एक बड़ी जिम्मेदारी देने जा रहा है. नई पॉलिसी में सभी जोनल रेलवे द्वारा पैंट्री कार सर्विस के कॉन्ट्रैक्ट आईआरसीटीसी को दे दिए जाएंगे. शॉर्ट नोटिस पर शुरू की गई सभी नई ट्रेनों में कैटरिंग सर्विस के प्रबंधन का जिम्मा भी आईआरसीटीसी को ही दिया जाएगा.
गौरतलब है कि इस समय लागू कैटरिंग पॉलिसी वर्ष 2010 में लागू की गई थी. ऐसा माना जा रहा है की पिछली सरकारों ने IRCTC को दरकिनार करते हुए मनमाने ढंग से प्राइवेट कंपनियों को रेलवे के खानपान की ज्यादातर सर्विसेज दे दी थी. इसका खामियाजा यह हुआ की निजी कंपनियों ने तो मोटा मुनाफा कमाया लेकिन बेचारा रेलयात्री घटिया खाना खा खाकर परेशान होता रहा. बार-बार आ रही शिकायतों के मद्देनजर रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बजट में इस बात की घोषणा की थी कि वह जल्द नई कैटरिंग पॉलिसी लाएंगे. अपने वादे को पूरा करने के लिए रेल मंत्री प्रभु ने तमाम विचार विमर्श के बाद 2016 की नई कैटरिंग पॉलिसी का ड्राफ्ट विचार विमर्श के लिए सामने रखा है.
नई पॉलिसी में जहां एक तरफ आईआरसीटीसी को सभी ट्रेनों में कैटरिंग का जिम्मा सौंपने की तैयारी है तो वहीं दूसरी तरफ प्लेटफार्म और रेलवे स्टेशन पर उचित क्वालिटी का स्वादिष्ट खाना मिले इसकी भी गारंटी दी जा रही है. रेलवे ने जहां एक तरफ ई-कैटरिंग को बढ़ावा देने की बात कही है तो वहीं दूसरी तरफ गाड़ियों में आन बोर्ड सर्विसेस को बेहतर बनाने के लिए भी कदम उठाए हैं. खाना उम्दा मिले और इसकी क्वालिटी में कोई समझौता ना हो इसके लिए सभी चलती-फिरती सेवाओं के लिए आईआरसीटीसी अपनी किचन से ही खाना उठाएगी. आईआरसीटीसी को रेलवे की सभी बेस किचन सौंप दी जाएंगी. इसके अलावा आईआरसीटीसी को यह अधिकार देने की तैयारी है कि यह हॉस्पिटैलिटी उद्योग की बड़ी कंपनियों को भी सर्विस देने के लिए अनुबंधित करे.
जोनल रेलवे के तहत आने वाली चारों बेस किचन नागपुर, सीएसटी मुंबई, बीसीटी मुंबई और बल्लारशाह को आईआरसीटीसी को सौंप दिया जाएगा. इसके अलावा जन आहार और रेलवे स्टेशनों पर मौजूद दूसरी किचन को भी आईआरसीटीसी को देने की तैयारी है. इसके पीछे जो सबसे बड़ी सोच बताई जा रही है वह सोच यह है कि ऐसा करने से खाने की क्वालिटी बेहतर की जा सकेगी. कैटरिंग सर्विस के मैनेजमेंट के लिए भारतीय रेलवे और आईआरसीटीसी के बीच नया मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग साइन किया जाएगा.
मोबाइल कैटरिंग सर्विस के लिए उचित तरीके की पेंट्रीकार को डिजाइन किया जाएगा और इसी के साथ स्टेट ऑफ ऑर्ट टेक्नोलॉजी के उपकरणों को कैटरिंग में शामिल किया जाएगा. इसके अलावा रेलवे ने एक दूसरा बड़ा फैसला लेने का निर्णय लिया है. जिसके तहत कैटरिंग में प्लेटफार्म पर और चलती ट्रेन में धीरे-धीरे गैस चूल्हा का प्रचलन खत्म किया जाएगा और इनकी जगह बिजली से चलने वाले उपकरणों को तरजीह दी जाएगी.
इसी के साथ नई ड्राफ्ट कैटरिंग पॉलिसी में सभी शताब्दी और जनशताब्दी ट्रेनों या ऐसी ही दूसरी ट्रेनों में मॉडर्न गैजेट्स से सुसज्जित मिनी पैंट्री लगाने की बात कही गई है. इन सभी ट्रेनों में ट्रॉली के जरिए लोगों को खाना परोसने की तैयारी है. आईआरसीटीसी जहां एक तरफ सौंपी गई कैटरिंग इकाइयों की जिम्मेदारी उठाएगी वहीं दूसरी तरफ फूड प्लाजा फूड कोर्ट और फास्ट फूड यूनिट के कामकाज को भी संभालेगी.
नई कैटरिंग पॉलिसी के ड्राफ्ट के मुताबिक सबर्बन स्टेशन और दूसरे रेलवे स्टेशनों पर खाना बनाने का काम नहीं किया जाना चाहिए. इसके लिए कुकिंग स्टाल्स और ट्रॉलियों में प्लेटफार्म के ऊपर कुकिंग के काम को धीरे-धीरे खत्म किए जाने पर जोर दिया जा रहा है. रेलवे धीरे-धीरे सभी प्लेटफार्मों पर बना बनाया खाना उपलब्ध कराने की कोशिश करेगा.
रेल मंत्रालय ने अगले कुछ सालों में रेलवे स्टेशनों पर ऑटोमेटिक सेल्फ वेंडिंग मशीनों को बढ़ावा देने की वकालत की है. जिलाधिकारियों का मानना है इससे जहां एक तरफ रेलवे स्टेशनों पर बेहतरीन सिस्टम बन जाएगा तो वहीं दूसरी तरफ गंदगी से छुटकारा मिलेगा. इसी के साथ जोनल रेलवे को इस बात की मनाही की गई है कि वह किसी नए खोमचे, डलिया, हाथ ठेला और चाय के बाल्टी के लिए कोई नया लाइसेंस नहीं जारी करेगा. इन सबके बीच रेलवे कैटरिंग की पॉलिसी के ड्राफ्ट में रेलवे स्टेशनों पर मौजूद छोटी कैटरिंग यूनिट के लिए सभी आरक्षित श्रेणियों में 33 फीसदी सब कोटा देने का फैसला भी किया गया है.
सबा नाज़ / सिद्धार्थ तिवारी