करारा जवाब मिलेगा! दुश्मनों के ऐसे दांत खट्टे करती रही है CRPF

CRPF का काफिला जम्मू-श्रीनगर हाईवे से गुजर रहा था. हाईवे किनारे एक कार पहले से खड़ी थी, जिसमें IED से लैस आत्मघाती हमलावर मौजूद था. काफिला जैसे ही कार के बगल से गुजरा, कार में बैठे आतंकी ने धमाका कर दिया.

Advertisement
आतंकियों से बदला लेना जानते हैं CRPF के जवान (फोटो: फाइल) आतंकियों से बदला लेना जानते हैं CRPF के जवान (फोटो: फाइल)

अमित कुमार दुबे

  • ,
  • 15 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 7:49 AM IST

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर इतना बड़ा हमला कभी नहीं हुआ. पुलवामा में किए गए इस हमले में CRPF के 37 जवान शहीद हो गए. जवानों को लेकर जा रही गाड़ियों के काफिले पर ऐसा आत्मघाती हमला हुआ, जिनकी गिनती दिल में दर्द और जेहन में आक्रोश पैदा करती है. इस निर्मम आतंकी हमले के पीछे है मसूद अजहर का आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और मास्टरमाइंड है, उसका आत्मघाती आतंकी आदिल अहमद डार.

Advertisement

दरअसल, CRPF का काफिला जम्मू-श्रीनगर हाईवे से गुजर रहा था. हाईवे किनारे एक कार पहले से खड़ी थी, जिसमें IED से लैस आत्मघाती हमलावर मौजूद था. काफिला जैसे ही कार के बगल से गुजरा, कार में बैठे आतंकी ने धमाका कर दिया. सीआरपीएफ के क़ाफिले में 78 गाड़ियां थीं. इन गाड़ियों में कुल 2547 जवान और अफसर सवार थे. काफिले में शामिल हर बस और ट्रक में करीब 35 से 40 जवान सवार थे.

इस आतंकी हमले ने देश को झकझोर दिया है. हर कोई बदले की आग में जल रहा है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस हमले से आहत हैं, उन्होंने कहा कि हमारे जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा. देश भी यही चाहता है कि भारत का खून बहाने वालों को सजा मिलनी चाहिए. वहीं CRPF अपने पराक्रम के लिए जानी जाती है. वह आतंकियों से बदला लेना भी जानती है.

Advertisement

CRPF के बारे में

केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) भारत के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सबसे बड़ा होता है. यह भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत काम करता है. देश में जब-जब बाहरी मुसीबतें आई हैं, CRPF के जवानों ने आगे बढ़कर चुनौती का सामना किया है और मुंहतोड़ जवाब दिया. CRPF ने सबसे पहले लद्दाख में 21 अक्‍टूबर 1959 को चीनी हमले को नाकाम किया था.

1962 के चीनी आक्रमण के दौरान एक बार फिर CRPF ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के साथ मिलकर अपनी ताकत दिखाई दी. पश्चिमी और पूर्वी दोनों सीमाओं पर 1965 और 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी CRPF ने भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया. 80 के दशक से पहले पंजाब में जब आतंकवाद छाया हुआ था, तब राज्‍य सरकार की मांग पर CRPF की तैनाती की गई थी.

CRPF की भूमिका

राज्य पुलिस की मदद करना, आतंकवाद निरोधी अभियान चलाना, शांति व्यवस्था कायम रखना, आतंकियों का मुकाबला करने में भी सीआरपीएफ के जवाने पीछे नहीं रहते हैं. सीआरपीएफ की एक महत्वपूर्ण बटालियन 'कोबरा' नक्सल विरोधी अभियान के लिए मुख्य रूप से गठित किया गया है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement