सरकार की निगरानी में आए 122 सुस्त नौकरशाह, सेवा की हो रही समीक्षा

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने 122 उप सचिवों द्वारा किए गए कामकाज की गुणवत्ता और मात्रा का पता लगाने के लिए कई मंत्रालयों से टिप्पणियां मांगी हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

स्‍वपनल सोनल

  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2016,
  • अपडेटेड 9:29 AM IST

सरकार ने अपेक्षा के अनुरुप प्रदर्शन नहीं करने वाले यानी सुस्त कामकाजी रवैया अपनाने वाले 120 से अधिक अधिकारियों को निगरानी में लिया है. ऐसे नौकरशाहों की सेवा की भी समीक्षा की जा रही है.

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने 122 उप सचिवों द्वारा किए गए कामकाज की गुणवत्ता और मात्रा का पता लगाने के लिए कई मंत्रालयों से टिप्पणियां मांगी हैं. डीओपीटी द्वारा बुधवार को जारी आदेश के मुताबिक, इनमें से सर्वाधिक 17 रक्षा मंत्रालय में कार्यरत हैं. इनके अलावा 13 उच्च शिक्षा में, सात स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में, जबकि वाणिज्य, खाद्य और जन वितरण, राजस्व वग्रामीण विकास विभाग प्रत्येक में छह-छह सेवारत हैं.

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इन विभागों-मंत्रालयों में भी हैं सुस्त बाबूजी
इसके अलावा इनमें से एक-एक अधिकारी राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड (नेटग्रिड), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय जैसे महत्वपूर्ण विभाग में भी कार्यरत हैं. इसी तरह श्रम और रोजगार, पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन विभागों के पांच-पांच और श्रम व रोजगार विभाग के चार अधिकारियों के कामकाज की भी समीक्षा की जा रही है. इसी तरह डीओपीटी, औद्योगिक नीति और प्रचार तथा कपड़ा मंत्रालय में तीन-तीन, कानूनी मामलों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, वित्तीय सेवा, नागरिक उड्डयन और आयुष मंत्रालयों में दो-दो अधिकारी हैं.

'ढि‍लाई बरतने वालों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति'
कैबिनेट सचिव प्रदीप कुमार सिन्हा के निर्देशों के तहत यह कदम उठाया गया है. सिन्हा ने संवेदनशील और गैर संवेदनशील पदों पर काम करने वाले अधिकारियों के रोटेशन पर जोर दिया है. सरकारी सेवकों के बीच ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने प्रदर्शन नहीं करने वाले अधिकारियों की समीक्षा का आह्वान किया है. इसके बाद सरकारी विभागों को ऐसे अधिकारियों के मातहत कर्मचारियों के प्रदर्शन की समीक्षा करने के लिए समिति बनाने को कहा गया है. काम में ढिलाई बरतने वालों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए मजबूर करने को कहा गया है.

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